अतुल्य भारत चेतना
रईस अहमद
बहराइच। जन जन के आंखों के तारे, नौजवानों के नायक तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष रहे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नेता जी सुभाष चंद्र बोस जी के 127वें जयंती पर जिला कांग्रेस सेवादल के तत्वावधान में सेनानी स्मारक चित्तौरा पर सामूहिक रूप से सलामी व पुष्पांजलि अर्पित करते हुए सादर सप्रेम नमन किया गया। इस अवसर पर कांग्रेस नेता विनय सिंह ने कहा नेता जी सुभाष चंद्र बोस जी का जन्म 23 जनवरी 1897 में बंगाल प्रांत के अन्तर्गत कटक कलकत्ता में हुआ था।

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उन्होंने देशभक्ति के जज़्बे और आत्मगौरव की भावना से प्रोबेशनर आईसीएस का ओहदा छोड़कर देशबन्धु चितरंजन दास की प्रेरणा से असहयोग तथा खिलाफत आन्दोलन में हिस्सा लेने के बाद 1928 व 1938 में कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहकर गांधी जी को राष्ट्रपिता की उपाधि दी थी। सेवादल के पूर्व अध्यक्ष इन्द्र कुमार यादव ने कहा कि नेता जी ने सशस्त्र क्रांति के इरादे से आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना की थी। उन्होंने दिल्ली चलो, एवं तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। इंकलाब जिंदाबाद, तथा वंदेमातरम आदि के लिए सबने मुक्त कंठ से सराहा तथा नेता जी कहकर अपना सर्वोच्च नेतृत्व माना था। जिला कांग्रेस सेवादल के अध्यक्ष रमेश चन्द्र मिश्र ने कहा कि नेता जी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के साथ साथ कांग्रेस सेवादल के चीफ आर्गनाइजर थे। जिनके ढिल्लन, सहगल और शहनवाज जैसे कमांडरों ने भी सेवादल की कमान संभालने के साथ देश व समाज में अहम भूमिका निभाई। गिरिजा दत्त झा ने कहा कि नेता जी 1928 में कांग्रेस महाधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए पूर्ण स्वराज व महिलाओं, वंचितों तथा कामगार वर्गों की मांग जोरदार तरीके से उठाई थी। इस अवसर पर मुनऊ पासवान, जगत राम चौहान, राजू मुस्तफा, जगदीश गौतम, अनुज मिश्र, संदीप गौतम सहित कई लोगों ने अपने अपने विचार ब्यक्त किए।
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