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तकनीकी समस्या को चालक की लापरवाही बताकर बीमा क्लेम खारिज किया जाना उचित नहीं उपभोक्ता आयोग

जैसलमेर।(सी आर देवपाल जैसलमेर)।

जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय करते हुए वाहन में तकनीकी समस्या आने पर उसे चालक की गलती बताकर कर बीमा कम्पनी द्वारा क्लेम खारीज किया जाना बीमा कम्पनी का सेवा दोष माना है। इस सम्बन्ध में जिला आयोग के निजी सचिव सुधांश सोनी ने बताया कि परिवादिया श्वेता बिस्सा द्वारा जिला आयोग के समक्ष एक परिवाद इस आशय का पेश किया कि उसका वाहन टाटा सफारी स्टॉम युनाइटेड इंण्डिया इं कं बीमित था 11 मई, 2022 को पोकरण से जैसलमेर आते समय धोलिया गांव के पास उक्त वाहन चलते-चलते स्वत ही बंद हो गया वाहन के बोनट के नीचे से धुआ निकलना शुरू हो गया। बीमा कंपनी को सूचना दी बीमा कंपनी ने सर्वेयर भेजा जिसने वाहन का मुआयना किया उनके कहे अनुसार अन्य वाहन से टोचिंग करवाकर जोधपुर मारम्मत हेतु भेजा जहां पार्ट्स व लेबर चार्ज सहित 623817.73 रुपये मरम्मत व्यय का भुगतान किया। बीमा क्लेम समस्त दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत किया। परंतु बीमा क्लेम का भुगतान अप्रार्थी बीमा कंपनी द्वारा नहीं किया गया। बीमा कंपनी द्वारा कथन किया गया कि केवल दुर्घटना से हुयी क्षति की अदायगी का पॉलिसी की शर्तों के अनुसार जोखिम का दायित्व बीमा कंपनी का विधि अनुरूप होता है। वाहन के इंजन की क्षति तकनीकी कारण से हुयी है जिसमें चालक की लापरवाही रही है अत कोई क्लेम प्राप्त करने की अधिकारी नहीं है।जिला उपभोकत विवाद प्रतिोतोष आयोग के अध्यक्ष एवं पीठासीन अधिकारी पवन कुमार ओझा एवं सदस्य रमेश कुमार गौड ने पत्रावली में प्रस्तुत शपथ पत्रों दस्तावेजी साक्ष्यो का विवेचन करने पर पाया गया कि पॉलिसी में इंजन एंड गियर बॉक्स प्रोटेक्शन स्टेण्डर्ड एड ऑन कवर के 1369 रुपये अप्रार्थी बीमा कंपनी ने परिवादिनी से चार्ज किये है जिससे इंजन एवं गियर बॉक्स पॉलिसी में कवर्ड थे। परिवादिनी का वाहन अचानक चलते-चलते बंद हुआ। इंजन और रेटर के भाग से धुंआ निकलना एवं अत्यधिक गर्म होने के कारण गाड़ी में तकनीकी समस्या आयी। अत बीमा कंपनी द्वारा इसे चालक की लापरवाही बताकर परिवादी का बीमा क्लेम खारिज किया जाना उचित नहीं है। अप्रार्थी बीमा कंपनी ने बीमा क्लेम का भुगतान नहीं करने एवं अपने बचाव में तकनीकी कारण एवं चालक की लापरवाही दर्शाकर सेवा में कमी की है। अतः आयोग के पास उपलब्ध विशेषज्ञ रिपोर्ट में दर्शायी गयी असिस्टमेंट लोस को आधार मानकर अप्रार्थी बीमा कंपनी को आदेशित किया गया कि वह परिवादिया को उसके बीमा क्लेम के 526086 रुपये अक्षरे पांच लाख छब्बीस हजार छियासी रुपये परिवाद दर्ज होने की दिनांक 06.12. 2022 से संपूर्ण राशि पर 6% वार्षिक दर से ब्याज अदा करे। मानसिक और शारीरिक क्षतिपूर्ति स्वरूप 20000रुपये अक्षरे बीस हजार रुपये एवं परिवाद व्यय पेटे 5000 रुपये अक्षरे पांच हजार रुपये अलग से अदा करे। उक्त आदेश की पालना निर्णय की तिथि से 45 दिन में की जावें। 45 दिन में अदा नहीं करने पर सम्पूर्ण देय राशि पर ताअदायगी 9 प्रतिशत की दर से ब्याज के अदा करे।

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सी आर जैसलमेर

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