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Chhindwara news; ध्वजारोहण के साथ धूमधाम से प्रारंभ हुआ अष्टाह्निका महापर्व: पार्श्वनाथ जिनालय में श्री रत्नकारंड श्रावकाचार विधान का शुभ आगाज

अतुल्य भारत चेतना
डॉ. मीरा पराड़कर

छिंदवाड़ा। जैन दर्शन का अनादि, निधनशून्य और शाश्वत महापर्व अष्टाह्निका का मंगलमय शुभारंभ आज कार्तिक शुक्ल सप्तमी के पावन अवसर पर विधि-विधान से संपन्न हुआ। नई आबादी गांधी गंज स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जिनालय में सकल जैन समाज, श्री दिगंबर जैन मुमुक्षु मंडल एवं अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन के श्रावकगणों ने प्रातःकालीन मंगल बेला में एकत्रित होकर इस पर्व की शुरुआत की। यह 8 दिवसीय महापर्व, जो वर्ष में तीन बार (आषाढ़, कार्तिक एवं फाल्गुन) मनाया जाता है, आत्मशुद्धि, तपस्या और तीर्थ-भक्ति का प्रतीक है। इस दौरान स्वर्गीय देवता नंदीश्वर द्वीप में धर्म कार्यों में लीन रहते हैं, जिससे भक्तों को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

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कार्यक्रम का शुभारंभ श्री जिनबिंब प्रक्षालन के बाद मंगलगान और स्वस्तिक चिन्ह बनाकर ध्वजारोहण से हुआ, जो पर्व की गरिमा को चारों ओर प्रतिबिंबित करता रहा। इस सौभाग्य का लाभ अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन के उपाध्यक्ष जिनेन्द्र जैन, सचिव दीपक राज जैन, रमेश जैन, सुबोध जैन, वीरेंद्र जैन, पंकज जैन, सचिन जैन तथा रूपेंद्र शास्त्री को प्राप्त हुआ। ध्वजारोहण के पश्चात सभी ने श्री रत्नकारंड श्रावकाचार विधान में उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो पर्व का प्रमुख आकर्षण रहा।

पर्व का आध्यात्मिक महत्व और विधान का प्रारंभ

अष्टाह्निका महापर्व जैन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है, जिसमें भक्त सिद्धचक्र मंडल पूजन, जिनवाणी रसास्वादन और स्वाध्याय के माध्यम से आंतरिक शुद्धि प्राप्त करते हैं। इस पर्व के पहले दिन विधान की पूर्णाहुति पर स्वाध्याय सभा का आयोजन किया गया, जहां उपस्थित श्रावकों ने डॉ. विवेक जैन के श्रीमुख से मां जिनवाणी का रसास्वादन किया। इस अवसर पर जैन ग्रंथों के महत्व पर प्रकाश डाला गया, जो भक्तों को जीवन में अहिंसा, सत्य और तपस्या के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करता है।

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विधान में रानी डॉ. के. सी. जैन, पदमा सुरेन्द्र जैन, प्रमिला जैन, नैना जैन, मंजू जिनेन्द्र जैन पायल वाला, पुष्पा रमेश जैन तथा प्राची रूपेंद्र जैन को मंगल कलश विराजमान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वहीं, अशोक कुमार ज्ञाता जैन वैभव परिवार को जिनवाणी विराजमान का विशेष सम्मान मिला। ये सभी अनुष्ठान पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति भजनों के साथ संपन्न हुए, जिससे जिनालय परिसर भक्ति रस से सराबोर हो गया।

समाज की एकजुटता और भावी योजनाएं

सकल जैन समाज के साथ मुमुक्षु मंडल एवं फेडरेशन के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया। फेडरेशन के उपाध्यक्ष जिनेन्द्र जैन ने कहा, “अष्टाह्निका पर्व हमें वर्ष भर की तपस्या का अवसर प्रदान करता है। हम 5 नवंबर तक कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा के अंतिम दिन तक इस महापर्व की मंगल आराधना करेंगे।” इस दौरान दैनिक स्वाध्याय, सामूहिक जप और विशेष प्रवचनों का क्रम जारी रहेगा, जो युवा पीढ़ी को जैन दर्शन से जोड़ने का माध्यम बनेगा।

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कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और परिवार सपरिवार उपस्थित रहे, जो समाज की एकता का प्रतीक था। आयोजकों ने सभी श्रावकों से अपील की कि वे इस पर्व का लाभ उठाकर अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊंचाइयों पर ले जाएं। यह महापर्व न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि जैन समुदाय की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करने का माध्यम भी है। छिंदवाड़ा के जैन समाज ने इस शुभारंभ को यादगार बनाते हुए आने वाले दिनों में भी उत्साह बनाए रखने का संकल्प लिया।

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News Desk

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