आदिवासी अधिकारों, अस्मिता और संवैधानिक संरक्षण का बुलंद संदेश
अतुल्य भारत चेतना (रवीन्द्र कटारे)
मांडव (धार)। आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा जल–जंगल–जमीन को बचाने के संकल्प के साथ निकाली जा रही आदिवासी एकता परिषद की “आदिवासियत (जल–जंगल–जमीन) बचाओ यात्रा” का मांडव नगर में भव्य एवं उत्साहपूर्ण स्वागत किया गया। यात्रा के मांडव पहुंचते ही आदिवासी समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जोशपूर्ण नारेबाजी के साथ यात्रा का अभिनंदन किया।

इसे भी पढ़ें (Read Also): स्वच्छता ही सेवा अभियान के अंतर्गत साफ-सफाई की गई इस
यह यात्रा 08 जनवरी 2026 से 15 जनवरी 2026 तक आयोजित की जा रही है, जिसका समापन पातालपानी, महू में आयोजित होने वाले 33वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन में होगा। यात्रा का उद्देश्य आदिवासी समाज को संगठित कर उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा जल, जंगल और जमीन पर हो रहे अतिक्रमण व शोषण के खिलाफ सशक्त आवाज बुलंद करना है।
स्वागत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और अस्तित्व जल–जंगल–जमीन से जुड़ा हुआ है और इनकी रक्षा करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। संविधान द्वारा प्रदत्त आदिवासी अधिकारों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। वक्ताओं ने युवाओं से अपनी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।
इस अवसर पर रीना मौर्य, भारती जमरा, रमेश राणा, सुनील निगवाल, जीवन ठाकुर एवं राहुल चौहान द्वारा यात्रा का नेतृत्व किया गया। वहीं कार्यक्रम में भानु गिरवाल, आनंद वसुनिया, निलेश वसुनिया, अशोक खड़ा, लखन वसुनिया, घनश्याम सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, ग्रामीणजन, युवा, महिलाएं एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक नारे, झंडे एवं सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से आदिवासी एकता, स्वाभिमान और संघर्ष का सशक्त संदेश दिया गया। पूरे आयोजन में उत्साह, अनुशासन और एकजुटता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
उल्लेखनीय है कि इस यात्रा का आयोजन आदिवासी एकता परिषद एवं समस्त सामाजिक संगठनों, जिला धार (मध्यप्रदेश) द्वारा किया जा रहा है, जो निरंतर आदिवासी हितों की आवाज को मजबूती से उठाते आ रहे हैं।

