रुपईडीहा बहराइच । भारत–नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित रुपईडीहा चेक पोस्ट पर इन दिनों यात्रियों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। सीमा से आवागमन करने वाले लोगों को प्रवेश और निकास में अपेक्षाकृत अधिक समय लग रहा है, जिससे आम यात्रियों, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति सीमा सुरक्षा बल एसएसबी द्वारा शुरू किए गए फेस-रीडिंग पायलट प्रोजेक्ट के कारण उत्पन्न हुई है। इस नई व्यवस्था के तहत यात्रियों की पहचान और सुरक्षा जांच को अधिक सटीक व आधुनिक बनाने के उद्देश्य से तकनीकी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। प्रारंभिक चरण होने के कारण जांच प्रक्रिया में समय अधिक लग रहा है, जिससे कतारें लंबी हो रही हैं। यात्रियों का कहना है कि रोजमर्रा के आवागमन, इलाज, व्यापार और पारिवारिक कारणों से सीमा पार करने वाले लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है। विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को खड़े रहकर लंबा समय बिताना कठिन हो रहा है। वहीं, एसएसबी 42वीं वाहिनी के कमांडेंट गंगा सिंह उदावत का पक्ष यह है कि यह पायलट प्रोजेक्ट पूरी तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू किया गया है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और पहचान की सटीकता बढ़ाना इस पहल का मुख्य लक्ष्य है। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था देशहित में आवश्यक है और भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। पायलट प्रोजेक्ट के सुचारु रूप से लागू होते ही प्रक्रियाओं को और सरल व तेज करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि सुरक्षा के साथ-साथ आम जनता को भी राहत मिल सके। फिलहाल, रुपईडीहा सीमा पर सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश जारी है। जहां एक ओर देश की सुरक्षा सर्वोपरि है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों की परेशानी को कम करने के लिए भी एसएसबी से अपेक्षा की जा रही है कि वैकल्पिक व्यवस्थाएं और बेहतर समन्वय किया जाए।
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