शहडोल।
शहडोल जिले के अंतिम छोर पर बसे पपौध क्षेत्र में आदिवासी कोल समाज को लेकर एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। क्षेत्र के आदिवासी समाज के सचिव श्री प्रेम लाल कोल एवं उनके साथी धुब कोल, सहित समाज के अन्य वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में आरोप लगाया है कि कुछ अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े लोग जानबूझकर कोल समाज को भ्रमित करने, राजनीतिक रूप से बदनाम करने और समाज की एकता को तोड़ने की साजिश रच रहे हैं।
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झूठे दावों से समाज में भ्रम फैलाने का आरोप
आदिवासी समाज के नेताओं का कहना है कि पपौध क्षेत्र के कोल समाज के सरपंच, पंच एवं जनपद सदस्य जैसे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के नाम बिना सहमति के अध्यक्षता व अन्य पदों के रूप में बैलेट और पंपलेट में छापे जा रहे हैं। यह सब झूठ बोलकर और बहला-फुसलाकर किया जा रहा है, जिससे समाज में गलत संदेश जा रहा है।
जब समाज के लोग वास्तविकता को समझते हैं, तो वे ऐसे आयोजनों और बैठकों में शामिल होने से साफ इंकार कर देते हैं। इसके बावजूद कुछ लोग समाज के नाम पर कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं, जो पूरी तरह से अनुचित और भ्रामक है।
चंदा वसूली और फर्जी कार्यक्रमों का भी आरोप
आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि समाज के नाम पर चंदा वसूली की जा रही है और उसी धन से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। समाज का कहना है कि इन गतिविधियों का न तो समाज की सहमति है और न ही कोई वैधानिक अनुमति। इसे समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया गया है।
शिकायत की तैयारी, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
कोल समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि इस तरह की गतिविधियां तत्काल बंद नहीं की गईं, तो वे जिला प्रशासन, निर्वाचन आयोग एवं संबंधित विभागों में लिखित शिकायत दर्ज कराएंगे। समाज ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
भाजपा के प्रति निष्ठा दोहराई
आदिवासी समाज के नेताओं ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि पपौध क्षेत्र का संपूर्ण कोल समाज भारतीय जनता पार्टी का पदेन कार्यकर्ता एवं सक्रिय सदस्य है। समाज ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें भाजपा से अलग दिखाने का प्रयास किया जा रहा है, जो पूरी तरह झूठा है।
समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“हम भारतीय जनता पार्टी के साथ थे, हैं और आगे भी रहेंगे। किसी भी कीमत पर समाज को तोड़ने या बदनाम करने की साजिश सफल नहीं होने दी जाएगी।”
क्षेत्र में बढ़ा राजनीतिक तनाव
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पपौध क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आदिवासी समाज में आक्रोश का माहौल है और लोग प्रशासन से निष्पक्ष जांच व तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

