प्रयागराज में त्रिदिवसीय दिव्य कला एवं कौशल प्रदर्शनी का भव्य समापन
अतुल्य भारत चेतना
आमिर मिर्ज़ा
प्रयागराज। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश मूक-बधिर विद्यालय के संयुक्त तत्त्वावधान में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, प्रयागराज में आयोजित त्रिदिवसीय ‘दिव्य कला एवं कौशल प्रदर्शनी’ का रविवार को समापन हुआ। समापन सत्र के मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र तथा विशिष्ट अतिथि माननीय न्यायमूर्ति विपिन चन्द्र दीक्षित रहे।
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मुख्य अतिथि ने की स्टालों की सराहना
माननीय न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र ने प्रदर्शनी में लगे सभी स्टालों का गहन अवलोकन किया। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश मूक-बधिर विद्यालय द्वारा संचालित कौशल प्रशिक्षण स्टाल की उन्होंने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
“दिव्यांगजनों में दिव्य रचनात्मक क्षमता होती है”
अपने उद्बोधन में न्यायमूर्ति श्री क्षितिज शैलेन्द्र ने कहा, “दिव्यांगजनों में दिव्य रचनात्मक क्षमता होती है। इनकी प्रतिभा और लगन देखकर मन गद्गद् हो जाता है। समाज और सरकार का दायित्व है कि इन्हें हर संभव अवसर और सहयोग दिया जाए।”
50 दिव्यांग बच्चों को मिले उपकरण
समापन सत्र में 50 दिव्यांग बच्चों को श्रवण यंत्र (Hearing Aids), MR किट तथा टिफिन बॉक्स वितरित किए गए। इस दौरान बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बाँधी रंगारंग समाँ
समापन सत्र में दिव्यांग बच्चों ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्हें उपस्थित सभी लोगों ने खूब सराहा।
इन संस्थाओं ने लिया भाग
प्रदर्शनी में बचपन डे-केयर सेंटर, उत्तर प्रदेश मूक-बधिर विद्यालय, भाविनी वेलफेयर सोसाइटी, माता कलावती कॉलेज, उड़ान स्पेशल स्कूल, ट्रेन ट्रस्ट, जन चेतना संस्थान, सक्षम सहित अनेक स्वैच्छिक एवं विभागीय संस्थाओं ने अपने स्टाल लगाए तथा दिव्यांगजनों की कला-कौशल का प्रदर्शन किया।
प्रमुख उपस्थित लोग
कार्यक्रम में अभय कुमार श्रीवास्तव (उपनिदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग), अशोक कुमार गौतम (जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी), डॉ. के.एन. मिश्र (प्रधानाचार्य, उत्तर प्रदेश मूक-बधिर विद्यालय), विकास पाण्डेय (जिला समन्वयक, समेकित शिक्षा) तथा श्री संदेश मिश्र (पाठ्यक्रम समन्वयक) प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता डॉ. प्रभाकर त्रिपाठी ने किया। तीन दिनों तक चली इस प्रदर्शनी ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि दिव्यांगता कोई बाधा नहीं, बल्कि दिव्य शक्ति का प्रतीक है।

