अतुल्य भारत चेतना
अखिल सुर्यवंशी
छिंदवाड़ा/मध्य प्रदेश। छिंदवाड़ा का केसरी नंदन हनुमान मंदिर न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे भारत में अपनी अनूठी परंपराओं और अटूट आस्था के लिए विख्यात है। यह प्राचीन पूर्व मुखी मंदिर, जो अयोध्या के बाद दूसरा पूर्व मुखी हनुमान मंदिर माना जाता है, भक्तों की मनोकामनाओं का केंद्र है। मंदिर की सबसे खास विशेषता है हर मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई, जिसमें श्रद्धालु अपनी समस्याएं और परेशानियां लिखित अर्जी के रूप में श्री केसरी नंदन हनुमान के चरणों में समर्पित करते हैं।
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जनसुनवाई: भक्तों की अर्जियां और हनुमान जी का आशीर्वाद
हर मंगलवार, मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालु अपनी अर्जियां लेकर पहुंचते हैं। ये अर्जियां व्यापार, नौकरी, विवाह, स्वास्थ्य, या किसी भी व्यक्तिगत अथवा प्रशासनिक समस्या से संबंधित हो सकती हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा भक्तों को एक आवेदन पत्र प्रदान किया जाता है, जिसमें वे अपनी मनोकामना लिखते हैं। अर्जी को मोड़कर उस पर सिंदूर से “जय श्री राम” लिखा जाता है और इसे हनुमान जी के चरणों में अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि हनुमान जी इन अर्जियों की सुनवाई करते हैं और भक्तों की मुरादें पूरी करते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी अनिल मालवी के अनुसार, “यहां कोई भी अर्जी खाली नहीं जाती। भक्तों की आस्था और हनुमान जी की कृपा से हर मनोकामना पूरी होती है।”
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नारियल की तोरण: आस्था का प्रतीक
मंदिर की एक और विशेषता है इसके चारों ओर बंधी नारियल की तोरणें। जब भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, वे मंदिर में नारियल चढ़ाते हैं, जिन्हें तोरण के रूप में मंदिर परिसर में बांधा जाता है। मंदिर के हर कोने में हजारों नारियल लटके हुए दिखाई देते हैं, जो भक्तों की अटूट आस्था और हनुमान जी के चमत्कार का प्रतीक हैं। कुछ भक्त नारियल को अपने पूजा घर में ले जाते हैं, क्योंकि कई बार प्रार्थना के दौरान नारियल टूटकर उनके हाथों में आ जाता है, जिसे वे शुभ मानते हैं। मंदिर को “नारियल वाले हनुमान मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है।
शनिवार की महा आरती और भंडारा: भक्ति का उत्सव
हर शनिवार को मंदिर में भव्य महा आरती और भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त भंडारे का आयोजन करते हैं, जिसमें हजारों लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं। मंदिर ट्रस्ट के पुजारी अनिल मालवी ने बताया कि भंडारा करवाने के लिए भक्तों को एक महीने तक इंतजार करना पड़ता है, क्योंकि मांग इतनी अधिक होती है। इस शनिवार, राजकुमार सूर्यवंशी, रामेश्वर सूर्यवंशी, अनिल सूर्यवंशी, अखिल सूर्यवंशी और उनके परिवार द्वारा भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। सुबह 11 बजे से रात 12 बजे तक चलने वाले इस भंडारे में जनसहयोग से हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। महा आरती के दौरान “जय श्री राम” और “जय हनुमान” के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठता है।
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मंदिर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता
छिंदवाड़ा के तिलक मार्केट, चार फाटक क्षेत्र में स्थित यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है। मंदिर में हनुमान जी बाल स्वरूप में विराजमान हैं, और उनके साथ भगवान श्री राम, सूर्य देव, और पवन देव की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। मंदिर के चारों दिशाओं में प्रवेश द्वार हैं, जो इसे और भी विशिष्ट बनाते हैं। मान्यता है कि यहां लगाई गई अर्जियां पवन देव की रक्षा में रहती हैं और हनुमान जी की कृपा से शीघ्र पूरी होती हैं। मंदिर में सालाना लगभग 50,000 अर्जियां जमा होती हैं, जिन्हें मंदिर प्रशासन संभालकर रखता है।
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भक्तों की आस्था और सुख-शांति की कामना
मंदिर में आने वाले भक्त न केवल छिंदवाड़ा, बल्कि दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र, और अन्य राज्यों से भी पहुंचते हैं। वे अपनी समस्याओं का समाधान पाने और सुख, शांति, समृद्धि की कामना के लिए हनुमान जी के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। मंदिर में प्रवेश से पहले भक्तों को हाजिरी रजिस्टर में “जय श्री राम” लिखकर अपना नाम, पता, और समय दर्ज करना होता है। यह परंपरा भक्तों और हनुमान जी के बीच एक गहरा आध्यात्मिक संबंध स्थापित करती है।
हनुमान जयंती और अन्य आयोजन
हनुमान जयंती और रामनवमी के अवसर पर मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में महा रुद्र अभिषेक, अखंड रामायण पाठ, हवन, और भंडारे का आयोजन किया जाता है। इन अवसरों पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है, और पूरा परिसर भक्ति और उत्साह से सराबोर हो जाता है।
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श्री केसरी नंदन हनुमान मंदिर छिंदवाड़ा में भक्तों की आस्था का एक जीवंत केंद्र है। यहां की जनसुनवाई, नारियल की तोरणें, और शनिवार की महा आरती भक्तों के लिए आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत हैं। हनुमान जी के इस दरबार में हर भक्त को अपनी अर्जी का जवाब और मनोकामना पूर्ति का विश्वास मिलता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।
