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सत्संग से प्रभु परमात्मा से मिलने का प्रेम पैदा किया जाता: पंकज जी महराज

अतुल्य भारत चेतना
अशोक सोनी

बहराइच। विश्व विख्यात परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के उत्तराधिकरी बाबा पंकज महाराज अपनी 108 दिवसीय यात्रा के अन्तिम पड़ाव पर गुरुवार को सायंकाल काफिले के साथ पहुँचे। लम्बी-लम्बी कतारों में भाई-बहनों, माताओं, बालिकाओं ने कलश दीप, आरती, पुष्पवर्षा, बैण्ड बाजों से ग्रामीण परिवेश के पारम्परिक तरीके से भावभीना स्वागत किया। आज 108वें दिन सत्स्ंग के साथ शाकाहार सदाचार मद्यनिषेध आध्यात्मिक वैचारिक जन-जागरण यात्रा सम्पन्न हो गई। समापन समारोह में उमड़े श्रद्धालुओं को सत्संग सुनाते हुए बाबा पंकज महाराज ने कहा कि सत्संग में किसी की निन्दा आलोचना नहीं की जाती, बल्कि प्रभु परमात्मा से मिलने का प्रेम पैदा किया जाता है। सत्संग से विवेक जागता है, सद्बुद्धि आती है, बुराईयों पर अंकुश लगता है। कहा कि मानव तन वेशकीमती है, यह जीवात्मा को जगाकर परमात्मा के पास जाने के लिये दिया जाता है। प्रभु के पास जाने का रास्ता इसी नर देही में है, जो परमात्मा का बनाया चेतन हरि मन्दिर है। इसी शरीर में नाम प्रकट है।
बाबा जयगुरुदेव जी महाराज द्वारा संस्थापित जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था मथुरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि सतयुग मे योग से, त्रेता में यज्ञ से, द्वापर में प्रतिमा पूजा से सिद्धि शक्ति, मुक्ति मिल जाया करती थी। परन्तु कलियुग में महात्माआंे ने पिछले युगों की उपासना और साधना पद्धतियों को निषेध कर दिया। ”जो साधन थे पिछले युग के, सो कलयुग में किये प्रमान।” और ”साधन तीन सार उन बरने, और साधन सब थोथे जान।“ कलयुग में सुरत शब्द योग (नाम योग) का सरल मार्ग सन्तों ने खोला, जिसमें सुमिरन, ध्यान, और भजन तीन साधन हैं। उन्होंने सत्संग के श्रोताओं को जीते जी प्रभु प्राप्ति का सरल से सरल मार्ग देकर उसकी क्रिया समझाई। जिसे सन्त मत में ”नामदान“ कहा जाता है।

बाबा जयगुरुदेव के कृपा-पात्र प्रिय शिष्य ने कहा कि मनुष्य शाकाहारी प्राणी है। इसे किसी धर्म में माँसाहार और नशा पीने का आदेश नहीं है। कहा कि हम अपने को कट्टर सनातनी, हिन्दू कहते हैं तो हमें अपने महापुरुषों राम, कृष्ण आदि के आदर्शाें पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम राज्य कोई नारा लगाने से, भाषण या वक्तव्य देने से, कानून बना देने से, अथवा तोड़फोड़, आन्दोलन, हड़ताल आदि करने से, नहीं आयेगा। राम राज्य लाना है तो सबको शाकाहारी नशामुक्त बनाना होगा। सबको मानवतावादी ईश्वरवादी, और भजनानन्दी बनना होगा। जब सब लोग परस्पर प्रेम से रहेंगे, अपने-अपने धर्म, कर्तव्य का ईमानदारी से पालन करेंगे, तब राम राज्य का सपना साकार होगा। उन्होंने चरित्र को मानव धर्म की सबसे बड़ी पूँजी बताया। देश में बढ़ते अपराध, कदाचार, हिंसा और नैतिक पतन पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए अपने-अपने बच्चों पर अच्छे संस्कार डालने की प्रार्थना की। शाकाहार और नशामुक्ति अपनाने की अपील की।
बाबा पंकज महाराज ने सभी लोगों से एक-एक गाँव गोद लेकर परम सन्त बाबा जयगुरुदेव के सन्देशों को जन-जन तक पहुँचाने का आग्रह किया। शाकाहारी नशामुक्ति के प्रचार पर जोर दिया। अच्छे सामज के निर्माण के भागीदार बनने का निवेदन किया।
उन्होंने 8 से 12 दिसम्बर तक मथुरा के वार्षिक भण्डारे में भाग लेने का निमन्त्रण दिया। इस अवसर पर रमाकान्त चौहान, बरातीलाल, भोला यादव, ग्राम प्रधान जय प्रकाश, देवेन्द्र सिंह, सहयोगी संगत लखीमपुर श्री कृष्ण यादव अनेक सभ्रान्त एवं गणमान्य नागरिक प्रतिष्ठित महानुभाव उपस्थित रहे।

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News Desk

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