अतुल्य भारत चेतना (रोहन संग्राम कांबळे)
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री युवा कार्य प्रशिक्षण योजना’ (Chief Minister Youth Work Training Scheme) के तहत प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं का गुस्सा अब चरम पर पहुंच गया है। योजना के तहत प्रशिक्षण पूरा करने के बाद नौकरी की गारंटी न मिलने से आहत लगभग 1 लाख 35 हजार युवा प्रशिक्षणार्थी बेरोजगार हो गए हैं। इन युवाओं ने सरकार के वादों को ‘चुनावी जुमला’ बताते हुए मुंबई के आजाद मैदान पर 19वें आंदोलन की शुरुआत की है, जो आज पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारी युवा सरकार से अपने हक की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
योजना की पृष्ठभूमि और वादे
महाराष्ट्र सरकार ने 9 जुलाई 2024 को इस योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य शिक्षित युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर रोजगार योग्य बनाना था। शुरुआत में योजना छह महीने की थी, जिसमें प्रशिक्षणार्थियों को मासिक स्टाइपेंड दिया जाता था – 12वीं पास के लिए 6,000 रुपये, आईटीआई/डिप्लोमा धारकों के लिए 8,000 रुपये और स्नातक/स्नातकोत्तर के लिए 10,000 रुपये। लोकसभा और विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रशिक्षण अवधि को बढ़ाकर 11 महीने कर दिया।
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तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (वर्तमान में उप-मुख्यमंत्री), तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (वर्तमान में मुख्यमंत्री) और कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने सार्वजनिक बयानों में युवाओं को आश्वासन दिया था कि प्रशिक्षण पूरा होने पर उन्हें उसी संस्थान में स्थायी नौकरी मिलेगी, जहां वे प्रशिक्षण ले रहे हैं। 9 जुलाई 2024 के सरकारी जीआर (GR) के मुद्दा नंबर 4.5 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि प्रशिक्षण के बाद संस्थान में युवा की आवश्यकता, कार्यक्षमता और व्यवहार के आधार पर उन्हें स्थायी रोजगार का अवसर दिया जाएगा।
योजना के तहत लगभग 10 लाख आवेदनों में से 5 लाख युवाओं को चुना गया था। हालांकि, दिसंबर 2025 तक योजना की अवधि को और पांच महीने बढ़ाया गया, लेकिन नौकरी की कोई गारंटी नहीं दी गई। कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने दिसंबर 2025 में विधानसभा में घोषणा की कि सरकार योजना को जारी रखने के लिए 418 करोड़ रुपये अतिरिक्त आवंटित कर रही है, साथ ही छह बिंदु नीति फ्रेमवर्क ला रही है। इसमें आईटीआई में 10% सीटें आरक्षित करना, 3% ब्याज पर ऋण, नवाचार केंद्र, स्वरोजगार प्रोत्साहन और जनवरी 2026 तक रोजगार लिंकेज शामिल हैं। लेकिन प्रदर्शनकारी युवा इसे ‘खोखला वादा’ मानते हैं, क्योंकि उन्हें नौकरी नहीं मिली।
आंदोलन की श्रृंखला और पुलिस कार्रवाई
युवा प्रशिक्षणार्थियों ने अब तक 18 आंदोलन किए हैं, जिनमें से अधिकांश शांतिपूर्ण रहे। 18वें आंदोलन के दौरान नागपुर में पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई युवा घायल हुए। विपक्षी नेता जैसे कांग्रेस के विजय वडेट्टीवार और नाना पटोले ने इसे ‘युवाओं पर अत्याचार’ बताते हुए सरकार की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री फडणवीस और उप-मुख्यमंत्री शिंदे ने चुनाव से पहले वीडियो क्लिप्स में नौकरी का वादा किया था।
अब 19वां आंदोलन मुंबई के आजाद मैदान पर चल रहा है। हजारों युवा यहां पांच दिनों से धरने पर बैठे हैं। वे ठंडी रातों में खुले मैदान पर सो रहे हैं, लेकिन उनका संकल्प अटूट है। प्रदर्शनकारी कहते हैं, “सरकार ने चुनाव के लिए हमें इस्तेमाल किया, वोट लिया और अब बेरोजगार छोड़ दिया। हमारा प्रशिक्षण व्यर्थ हो गया।” आंदोलन में महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हैं, जो रोजगार की मांग को लेकर आवाज उठा रही हैं।
युवाओं की मुख्य मांगे
- प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी 1 लाख 35 हजार युवाओं को उसी संस्थान में स्थायी नौकरी।
- 9 जुलाई 2024 के जीआर के मुताबिक वादों का पालन।
- स्टाइपेंड और प्रशिक्षण अवधि के दौरान किए गए कार्य का उचित मूल्यांकन।
- योजना को स्थायी बनाने और नौकरी गारंटी का प्रावधान।
- पुलिस कार्रवाई की जांच और दोषियों पर कार्रवाई।
नेतृत्व और समर्थन
आंदोलन का नेतृत्व बालाजी पाटील चाकूरकर (संघटना प्रदेशाध्यक्ष), श्री संत बागडे बाबा (मानव मित्र संघटना संस्थापक अध्यक्ष), तुकाराम बाबा महाराज (मुख्यमंत्री युवा कार्य प्रशिक्षणार्थी संघटना प्रदेश कार्याध्यक्ष), पवन भड (अकोला जिला अध्यक्ष), वर्षा लहाने (छत्रपती संभाजी नगर महिला जिला अध्यक्ष), गोविंद शिंदे (लातूर जिला उपाध्यक्ष, आरोग्य विभाग), हीना पानसरे (सातारा जिला महिला अध्यक्ष) जैसे नेता कर रहे हैं। ये नेता युवाओं को एकजुट रखते हुए मीडिया के माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
मीडिया का समर्थन मिल रहा है, लेकिन विपक्षी पार्टियां जैसे कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाया है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा, “सरकार ने युवाओं को धोखा दिया। चुनाव में इस्तेमाल किया और अब लाठी से जवाब दे रही है।” वहीं, सरकार का कहना है कि योजना रोजगार योग्यता बढ़ाने के लिए है, न कि नौकरी गारंटी के लिए। मंत्री लोढा ने कहा कि योजना समाप्त नहीं होगी और जनवरी 2026 तक रोजगार लिंकेज सुनिश्चित किया जाएगा।
क्या होगा आगे?
युवा प्रशिक्षणार्थी कहते हैं, “सरकार को वादा निभाना पड़ेगा, वरना आंदोलन और तेज होगा।” आजाद मैदान पर जारी यह धरना महाराष्ट्र की युवा बेरोजगारी की बड़ी समस्या को उजागर कर रहा है। सरकार की ओर से अब तक कोई उच्च स्तरीय बैठक नहीं हुई है, लेकिन दबाव बढ़ने पर वार्ता की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी चुनावों में राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनौती बन सकता है।
इस आंदोलन से जुड़ी अपडेट्स के लिए बने रहें। युवाओं का संघर्ष जारी है, और वे कहते हैं – “हमारा हक हमें मिलकर रहेगा।”

