अतुल्य भारत चेतना संवाददाता खुमेश यादव
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नारायणपुर, 02 जनवरी 2026// कलेक्टर नम्रता जैन द्वारा पुनर्वास केन्द्र में आत्मसमर्पित नक्सलियों को स्वयं अक्षरज्ञान का पाठ पढ़ाया गया। यह क्षण केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं था, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व और मानवीय दृष्टिकोण का सशक्त उदाहरण था। कलेक्टर जैन ने अपने जीवन के संघर्ष, निरंतर प्रयास, लक्ष्य निर्धारण और उपलब्धियों के अनुभव साझा करते हुए युवाओं को यह संदेश दिया कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो अतीत की गलतियों को भविष्य की उपलब्धियों में बदल सकती है।
कक्षा का वातावरण अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक था। जब कलेक्टर ने स्वयं ब्लैकबोर्ड पर अपना नाम लिखा, तो कुछ क्षणों के लिए सन्नाटा छा गया। चॉक की आवाज़ और बोर्ड पर उभरते अक्षरकृमानो युवाओं के भीतर भी नई चेतना जगा रहे हों। उसी प्रेरणा से उत्साहित होकर पुनर्वासित युवाओं ने भी पहली बार पूरे आत्मविश्वास और गर्व के साथ अपने-अपने नाम लिखे। किसी के हाथ काँप रहे थे, किसी की आँखों में चमक थी कि यह उनकी पहली जीत थी। जो हाथ कभी हिंसा की राह में भटक गए थे, वही हाथ आज अक्षरों से अपना भविष्य लिख रहे थे। यह बदलाव केवल पढ़ना-लिखना सीखने का नहीं, बल्कि सोच, आत्मसम्मान और जीवन दृष्टि के परिवर्तन का प्रतीक है।
कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन एवं निर्देशानुसार शिक्षा विभाग द्वारा पुनर्वास केन्द्र में अक्षरज्ञान की कक्षाएँ निरंतर संचालित की जा रही हैं, जहाँ अनुभवी शिक्षकों द्वारा धैर्य, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ युवाओं को शिक्षा प्रदान की जा रही है। इन कक्षाओं का उद्देश्य युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर एवं सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर करना है। इस परिवर्तन यात्रा में पुनर्वास केन्द्र के नोडल अधिकारी डॉ. सुमित गर्ग (डिप्टी कलेक्टर सह एसडीएम, ओरछा) द्वारा भी युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ जीवन के उद्देश्य, सकारात्मक सोच, अनुशासन और लक्ष्य प्राप्ति का मंत्र निरंतर दिया जा रहा है। साथ ही, जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज नारायणपुर में संचालित पुनर्वास केन्द्र के प्रभारी अधिकारी श्री मानकलाल अहिरवार (जिला रोजगार अधिकारी सह सहायक परियोजना अधिकारी) द्वारा भी युवाओं को नियमित रूप से अक्षरज्ञान प्रदान कर मार्गदर्शन किया जा रहा है।

