रुद्रपुर– जिला अस्पताल रुद्रपुर में सोमवार सुबह इलाज के लिए पहुंचे एक मरीज के उस समय होश उड़ गए, जब चिकित्सकों ने जांच पूरी होने के बाद उसे उपचार के लिए 77 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जाने की सलाह दे दी। आरोप है कि मरीज को दवाएं दिए बिना ही अस्पताल से बैरंग लौटा दिया गया।
पीलीभीत जिले के मुंडरिया गांव निवासी फरयाद हुसैन वर्तमान में रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रहते हैं। करीब तीन वर्ष पहले वह रोजगार की तलाश में रुद्रपुर आए थे। फरयाद ने बताया कि 11 दिसंबर को उन्हें भूख न लगने और अत्यधिक थकान महसूस होने लगी, जिसके बाद वह जिला अस्पताल रुद्रपुर में उपचार के लिए पहुंचे।
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अस्पताल में डॉ. एमके तिवारी ने उन्हें जांच कराने की सलाह दी। 15 दिसंबर को जांच रिपोर्ट आने पर फरयाद को काला पीलिया (जॉन्डिस) होने की पुष्टि हुई। इसके बाद जब उन्होंने डॉक्टरों से इलाज के लिए दवाएं मांगीं तो आरोप है कि चिकित्सकों ने यह कहकर उपचार से इनकार कर दिया कि वह उत्तर प्रदेश के निवासी हैं और उन्हें पीलीभीत जाकर ही इलाज कराना होगा। डॉक्टरों ने कथित तौर पर कहा कि जांच यहां हो गई है, लेकिन इलाज यूपी में ही चलेगा।
मरीज का कहना है कि ठंड के इस मौसम में 77 किलोमीटर दूर पीलीभीत जाकर इलाज कराना उसके लिए बेहद मुश्किल है। फरयाद हुसैन ने इस मामले को लेकर एक वीडियो भी प्रसारित किया है, जिसमें उन्होंने पैथोलॉजी लैब के एक कर्मचारी पर जांच के नाम पर 500 रुपये शुल्क लेने का आरोप लगाया है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से सफाई दी गई है। पीएमएस आरके सिन्हा ने कहा कि जिला अस्पताल में किसी भी अन्य प्रदेश के मरीज के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। सभी मरीजों को समान रूप से उपचार और दवाएं दी जाती हैं। यदि जांच के नाम पर किसी कर्मचारी द्वारा पैसे लेने या किसी मरीज को इलाज से वंचित करने का मामला सामने आता है, तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है और मरीज को न्याय दिलाने की मांग उठने लगी है।

