अतुल्य भारत चेतना/मोहम्मद अशफाक
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लखीमपुर खीरी,
एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें स्वच्छ भारत मिशन के तहत देशभर में साफ-सफाई और स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर इन दावों की जमीनी सच्चाई कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। लखीमपुर खीरी जनपद की ब्लॉक फूलबेहड़ अंतर्गत ग्राम पंचायत श्रीनगर की गलियों में फैली गंदगी ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्राम पंचायत श्रीनगर की स्थिति यह है कि गांव की अधिकांश गलियों में कूड़े-कचरे का ढेर लगा हुआ है। नालियां गंदगी से भरी पड़ी हैं, जिससे दुर्गंध फैल रही है और संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। हालात इतने खराब हैं कि ग्रामीणों को स्वयं ही झाड़ू उठाकर अपनी गली-मोहल्लों की सफाई करनी पड़ रही है। कई स्थानों पर ग्रामीण खुद ही गंदी नालियों की सफाई करते नजर आते हैं, जो स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों से सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजतन, गांव की स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह ग्रामीणों के भरोसे छोड़ दी गई है।
जब इस संबंध में पत्रकार ने ग्राम प्रधान मोहम्मद रफी प्रतिनिधि से सवाल किया तो चौंकाने वाला जवाब सामने आया। प्रधान प्रतिनिधि मोहम्मद रफी ने बताया कि बीते लगभग पांच वर्षों से ग्राम पंचायत को कोई भी सफाई कर्मचारी उपलब्ध नहीं कराया गया है। सफाई कर्मियों की कमी के चलते नियमित सफाई कराना संभव नहीं हो पा रहा है।
यह स्थिति न केवल स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग और प्रशासन कब तक इस ओर ध्यान देता है और ग्राम पंचायत श्रीनगर को साफ-सफाई के नाम पर राहत मिलती है या नहीं।

