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ड्रेगन फ्रूट व सब्ज़ी की खेती से कृषकों को सफलता की राह दिखा रहे 02 कृषक

ड्रेगन फ्रूट व सब्ज़ी की खेती से कृषकों को सफलता की राह दिखा रहे 02 कृषक

सूरज कुमार तिवारी

संवाददाता बहराइच

बहराइच 14 दिसम्बर दिन रविवार। विकास खण्ड चित्तौरा के ग्राम रायपुर नि. कृषक कल्लूराम 0.60 हे. भूमि पर विगत कई वर्षों से शाकभाजी फसलों की खेती की रही है। लतावर्गीय शाकभाजी की खेती के शुरूआती दिनों में इनके द्वारा मचान विधि का प्रयोग नहीं किया जाता था, जिससे फल एवं फसलों को नुकसान पहुँचने से अपेक्षाकृत लाभ कम प्राप्त होता था। वर्तमान समय में इनके द्वारा 0.40 हे. में लौकी एवं खीरा की खेती मचान विधि से तथा 0.20 हे. क्षेत्रफल में संकर मिर्च की खेती की जा रही है। लौकी एवं खीरा की खेती मचान विधि से खेती के लिए रू. 30 हज़ार व्यय करने पर इन्हें रू. 1.30 लाख का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है।

इसी प्रकार 0.20 हे. क्षेत्रफल में संकर मिर्च की खेती करने पर इनका सभी कृषि रक्षा रसायनो, उर्वरकों एवं बेहन पर लगभग रू. 30 हज़ार का व्यय होने के उपरान्त अभी तक कृषक को रू. 95 हज़ार का लाभ प्राप्त हुआ है। इनके द्वारा रोपित शाकभाजी एवं मिर्च फसल अभी भी फल दे रहें है, जिससे इन्हें 15 से 20 प्रतिशत और लाभ होने की संभावना है। कृषक कल्लूराम की खेती से प्रभावित होकर क्षेत्र के अन्य कृषक भी औद्यानिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

वहीं दूसरी तरफ ब्लाक चित्तौरा के ग्राम अहिरौरा नि. कृषक राज कुमार चौधरी 0.50हे. भूमि पर पारम्परिक विधि से खेती की जाती थी, जिससे इन्हें लागत की तुलना में कम आय प्राप्त हो रही थी। कृषि को अपनी आय का मुख्य स्रोत बनाने के लिए श्री चौधरी द्वारा उद्यान विभाग से सम्पर्क करने पर इन्हें कृषि फसलों की अपेक्षा औद्यानिक खेती के लिए सुझाव दिया गया। कृषक श्री चौधरी द्वारा औद्यानिक फसलों की खेती हेतु ड्रेगन फ्रूट को चुनते हुए 07 जुलाई, 2023 को अपने प्रक्षेत्र पर 2000 पौधों का रोपण किया।

यह जानकारी देते हुए जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि रोपण के 18 माह बाद फसल में फल आने शुरू हुए। जिससे इन्हें अपनी फसल में लगाई गई लागत के अतिरिक्त रू. 2.25 लाख का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। ड्रेगन फ्रूट से इन्हें आगामी 20 से 25 वर्ष में औसतन 4 से 5 लाख प्रति वर्ष आय प्राप्त होगी। औद्यानिक खेती से प्रभावित होकर श्री चौधरी द्वारा वर्ष 2024-25 में एप्पल बेर, ताईवान पिंक अमरूद के पौधों का रोपण किया गया है, जिससे इन्हें आगामी समय में अच्छा लाभ प्राप्त होने की सम्भावना है। उद्यान विभाग द्वारा दिये जा रहे प्रोत्साहन तथा श्री चौधरी की खेती से प्रभावित होकर क्षेत्र के अन्य कृषक भी ड्रेगन फ्रूट की खेती की ओर आकर्षित हो रहें हैं, जिससे आगामी समय में जनपद में ड्रेगन फ्रूट के क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी होने की सम्भावना है।

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सूरज तिवारी

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