संवाददाता: जितेंद्र कुमार
अतुल्य भारत चेतना
जयपुर (राजस्थान)
NCBI पर मौजूद इस रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टरों की निगरानी में दवाओं से गर्भपात का सक्सेस रेट 92-97% है, लेकिन खुद से दवा खाना मौत को दावत देना है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि मेडिकल स्टोर पर बिना डॉक्टर के पर्चे के गर्भपात दवाओं की बिक्री कितनी जानलेवा हो सकती है।बिना डॉक्टरी सलाह के अबॉर्शन पिल्स का इस्तेमाल कर महिलाओं के जान गंवाने का सिलसिला बना हुआ है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट के मुताबिक अबॉर्शन पिल्स से किया गया गर्भपात सर्जिकल अबॉर्शन से 10 गुना ज्यादा खतरनाक होता है।
भारत समेत पूरी दुनिया में हर साल करोड़ों महिलाओं की जान असुरक्षित गर्भपात की वजह से चली जाती है…
यह एक गंभीर चिकित्सीय प्रक्रिया है जिसके कई शारीरिक और मानसिक जोखिम हो सकते हैं। एक योग्य चिकित्सा पेशेवर की देखरेख और मार्गदर्शन के बिना, यह निम्नलिखित समस्याओं का कारण बन सकता है:

अधूरा गर्भपात (Incomplete Abortion): गर्भाशय के अंदर ऊतक (tissue) रह जाने से गंभीर संक्रमण और रक्तस्राव हो सकता है। कई बार अबॉर्शन पिल्स खाने के बाद भी गर्भपात ठीक से नहीं हो पाता। अगर भ्रूण का एक अंश भी शरीर में रह जाए तो इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है और बुखार आता है। फेलोपियन ट्यूब बंद हो जाती है और कई बार फट भी जाती है। बच्चेदानी में पस पड़ सकता है और इंफेक्शन पूरे शरीर में फैल जाए तो जान भी जा सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2020 में दुनिया में हर 8 मिनट में 1 महिला ने अनसेफ अबॉर्शन से अपनी जान गंवाई। करीब 4 करोड़ महिलाएं अनचाहे गर्भ की शिकार हुईं, जिसमें से 2 करोड़ ने अनसेफ अबॉर्शन के तरीकों को अपनाया और इनमें 68 हजार महिलाओं ने दम तोड़ा।
भारी रक्तस्राव (Severe Bleeding): अत्यधिक खून बहने से जान का जोखिम हो सकता है।
अगर किसी महिला को खून की कमी हो और वह डॉक्टर की सलाह के बिना गोली लेती है तो यह उनके लिए जानलेवा है। डॉ.का मानना है कि,अक्सर गोली खाने के बाद ब्लीडिंग होती है। अगर ब्लीडिंग ज्यादा हो जाए तो महिला की जान जा सकती है।
संक्रमण (Infection): गर्भाशय और आसपास के अंगों में गंभीर संक्रमण फैल सकता है, जिससे बांझपन या सेप्टिक शॉक (septic shock) जैसी जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
गर्भाशय को नुकसान (Damage to Uterus): गर्भाशय में छेद (perforation) हो सकता है, जिसके लिए आपातकालीन सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।
मानसिक और भावनात्मक प्रभाव (Psychological Impact): असुरक्षित गर्भपात का महिलाओं पर गहरा मानसिक और भावनात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
कानूनी और सुरक्षित विकल्प: महिलाओं की सुरक्षा प्राथमिकता
भारत में गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम, 1971 (Medical Termination of Pregnancy Act, 1971) के तहत, केवल पंजीकृत चिकित्सक (RMP) ही निर्धारित शर्तों और सुरक्षित तरीकों से गर्भपात कर सकते हैं। असुरक्षित तरीकों को अपनाना न केवल अवैध है, बल्कि जानलेवा भी। सुरक्षित और कानूनी गर्भपात सेवाओं के लिए, महिलाओं को हमेशा एक लाइसेंस प्राप्त स्वास्थ्य सेवा प्रदाता या क्लिनिक से संपर्क करना चाहिए। आप अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करके सही मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
हे माँ, अपने हौसलों की उड़ान भरो, सुरक्षा का पहला कदम सही जानकारी है। महिलाओं को जागरूक बनाना और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। असुरक्षित गर्भपात के खिलाफ आवाज उठाएं और जीवन बचाएं।
हे, माँ अपने हौसलों की उड़ान भरो , सुरक्षा का पहला कदम सही जानकारी
भारत में, गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम, 1971 (Medical Termination of Pregnancy Act, 1971) के तहत, केवल पंजीकृत चिकित्सक (RMP) ही निर्धारित शर्तों और सुरक्षित तरीकों से गर्भपात कर सकते हैं।
सुरक्षित और कानूनी गर्भपात सेवाओं के लिए, कृपया हमेशा एक लाइसेंस प्राप्त स्वास्थ्य सेवा प्रदाता या क्लिनिक से संपर्क करें। आप अपने नज़दीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करके सही मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

