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नोएडा में ‘प्रेरणा विमर्श–2025’ का दूसरा दिन: नवोत्थान के नए क्षितिज पर गहन चर्चा

अतुल्य भारत चेतना | संवाददाता

नोएडा। प्रेरणा शोध संस्थान न्यास के तत्वावधान में सेक्टर-62 स्थित राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) में आयोजित ‘प्रेरणा विमर्श–2025’ के अंतर्गत ‘नवोत्थान के नए क्षितिज’ कार्यक्रम के दूसरे दिन (रविवार, दिनांक 14 दिसंबर 2025) देश के प्रमुख मीडियाकर्मियों, विचारकों और विशेषज्ञों ने समसामयिक विषयों पर सारगर्भित विमर्श किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पत्रिका ‘केशव संवाद’ के विशेषांक का विमोचन भी किया गया।

प्रथम सत्र: आर्थिक क्षेत्र में नवोत्थान – ‘धर्मस्य मूलं अर्थः’

इस सत्र में वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने कहा कि देश की सबसे बड़ी चुनौती स्वदेशी डिजिटल इकोसिस्टम का अभाव है। विदेशी कंपनियां जैसे एप्पल, अमेजन, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा हर वर्ष अरबों रुपये भारत से बाहर ले जा रही हैं। उन्होंने टेक्नोलॉजी क्षेत्र में गंभीर चिंतन की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने सराहना की कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। रेलवे, हवाई सेवा, एक्सप्रेस-वे जैसे बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विकास हुआ है। यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली बन चुकी है और 2014 के बाद आर्थिक वृद्धि दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य रूपेश कुमार ने कहा कि एक समय भारत विश्व व्यापार का 25 प्रतिशत हिस्सा संभालता था। आज युवा भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं। देश में दो लाख से अधिक स्टार्टअप्स हैं, जिनमें 48 प्रतिशत में महिलाएं निदेशक और 18 प्रतिशत में स्वामित्व रखती हैं। सरकार की नीतियों से जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है, जिससे आर्थिक गति बढ़ी है। मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता बढ़ी है। पहले विदेशी शक्तियां भारत को केवल बाजार मानती थीं और इसे आर्थिक रूप से सशक्त नहीं देखना चाहती थीं।

सत्र का संचालन ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हरीश बर्णवाल ने किया। उन्होंने कहा कि आज नरेटिव और विचारों की लड़ाई चल रही है तथा समय में सकारात्मक बदलाव आया है।

द्वितीय सत्र: सामाजिक क्षेत्र में नवोत्थान – ‘हिन्दवः सोदरा सर्वे’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख राजकुमार मटाले ने कहा कि भारतीय दर्शन विश्व-कल्याण का संदेश देता है और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ इसकी मूल भावना है। प्राचीन भारत में जाति व्यवस्था कर्म-आधारित थी तथा ‘आर्य’ शब्द श्रेष्ठता का सूचक है, न कि जाति का। मत-परिवर्तन सरल हो सकता है, लेकिन मन-परिवर्तन के लिए समाज को निरंतर प्रयास करना पड़ता है। अंग्रेजों और कुछ राजनीतिक शक्तियों ने समाज को बांटने का प्रयास किया, किंतु अब सकारात्मक बदलाव के परिणाम दिखाई दे रहे हैं।

वी केयर फिल्म फेस्टिवल एंड ब्रदरहुड के निदेशक सतीश कपूर ने कहा कि भारतीय संस्कार समानता और सम्मान का संदेश देते हैं। हमें अपने आसपास के लोगों के साथ व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए। 2014 के बाद समाज की सोच में सकारात्मक परिवर्तन आया है। दिव्यांगजनों के प्रति दृष्टिकोण बदला है और पैरा ओलंपिक विजेताओं को समान सम्मान मिल रहा है। फिल्मों एवं सिनेमा में भी बदलाव दिख रहा है तथा समाज अब खुलकर संवाद कर रहा है, जो स्वस्थ संकेत है।

सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार एवं टीवी एंकर रामवीर श्रेष्ठ ने किया। उन्होंने विषय के विभिन्न पहलुओं को रोचक एवं तार्किक ढंग से प्रस्तुत किया।

तृतीय सत्र: सांस्कृतिक क्षेत्र में नवोत्थान – ‘जननी जन्मभूमिश्च’

अभिनेता एवं रंगकर्मी मनोज जोशी ने कहा कि भारतीयता के मूल में आध्यात्म है। तुष्टिकरण की प्रवृत्ति फिल्मों तक पहुंची, किंतु वेद, शास्त्र, पुराण एवं दर्शन की परंपरा अटूट रही। आक्रांताओं ने नालंदा जैसे विश्वविद्यालय जलाए, फिर भी श्रुति-समृति परंपरा से ज्ञान सुरक्षित रहा। रामायण जैसी ग्रंथ-परंपरा न होती तो व्यापक धर्मांतरण हो चुका होता। आज की शिक्षा पद्धति से युवा पीढ़ी इन मूल्यों को समझने लगी है। श्रोताओं के अनुरोध पर मनोज जोशी ने ‘चाणक्य’ सीरियल के प्रसिद्ध संवाद बोलकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य राजीव तुली ने कहा कि भारत भूमि के मौलिक संस्कार कभी समाप्त नहीं हो सकते। समाज को जैसे संस्कार एवं शिक्षा मिलेगी, वैसा ही उसका स्वरूप बनेगा। सकारात्मक मूल्य सिखाने से समाज स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ेगा।

वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडिया टीवी की एंकर मीनाक्षी जोशी ने कहा कि सांस्कृतिक चेतना प्रबल होने पर राष्ट्र मजबूती से आगे बढ़ता है। इसके लिए वैचारिक एवं सांस्कृतिक सुदृढ़ता आवश्यक है।

सभी सत्रों के अंत में वक्ताओं ने श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर दिए।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड प्रचार प्रमुख कृपाशंकर, प्रेरणा शोध संस्थान न्यास की अध्यक्ष प्रीति दादू, प्रेरणा विमर्श–2025 के अध्यक्ष अनिल त्यागी, समन्वयक श्याम किशोर सहाय, सह संयोजक अखिलेश चौधरी, सचिव मोनिका चौहान, नोएडा विभाग संघचालक सुशील कुमार तथा राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष प्रो. अखिलेश मिश्रा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऋतु दुबे तिवारी, डॉ. मनमोहन सिसोदिया एवं मोनिका चौहान ने संयुक्त रूप से किया। अंत में सभी का आभार व्यक्त किया गया।

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News Desk

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