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Mon. Jan 12th, 2026

श्रीमद्भागवत में शिव-पार्वती विवाह के प्रसंग का किया गया वर्णन

संगीतमय कथा सुनकर भक्तगण हुए भाव विभोर

अतुल्य भारत चेतना
हाकम सिंह रघुवंशी

नटेरन/विदिशा। शिव विवाह की लीला का वर्णन नटेरन ग्राम नगतरा में जिंद बाबा की पहाड़ियां पर विगत 2 दिन से चल रही श्रीमद् भागवत कथा में शिव पार्वती जी के विवाह की लीला का संगीतमय सुंदर वर्णन किया गया कथा के दौरान
माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन देकर कहा कि वो किसी राजकुमार के साथ विवाह कर ले. लेकिन पार्वती ने साफ इंकार कर दिया. उन्होंने कहा कि वो मन ही मन शिव को अपना पति मान चुकी हैं और ऐसे में किसी अन्य व्यक्ति के साथ रहना आसान नहीं होगा। अपने प्रति पार्वती का असीम प्रेम देख भोलेनाथ का मन पिघल गया और वे पार्वती से विवाह के लिए राजी हो गए।

अनोखी बारात लेकर पार्वती से विवाह करने पहुंचे शिव

शिव-पार्वती के विवाह शिव जी जब माता पार्वती से विवाह रचाने के लिए पहुंचे तो अपने साथ भूत-प्रेत और चुड़ैलों की बाराती लेकर पहुंचे. इन्होंने ही शिवजी का श्रृंगार भी किया था. शादी के लिए शिवजी का भस्म से श्रृंगार किया गया और हड्डियों की माला पहनाई गई. जब ऐसी अनोखी बारात लेकर शिव बारातियों के साथ पार्वती के द्वार पर पहुंचे तो सभी डर गए और हैरान रह गए: पार्वती की माता मैनावती ने तो विवाह से इंकार कर दिया था. तब पार्वती ने शिव जी से प्रार्थना करते हुए कहा कि वह विवाह के रीति-रिवाजों के अनरूप तैयार हो जाएं. शिवजी मान गए और इसके बाद देवताओं द्वारा शिवजी को दूल्हे के रूप में तैयार किया गया।

जब शिवजी दूल्हा बनकर तैयार हो गए तो उनका दिव्य रूप देखकर सभी चकित रह गए। रानी मैनावती भी विवाह के लिए मान गई। इसके बाद बाराती-शराती, भूत-प्रेत, सभी देवता और सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी की मौजूदगी में शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ।

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News Desk

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