जैसलमेर।(सी आर देवपाल जैसलमेर)।
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बैंक की लापरवाही को मानते हुए उपभोक्ता के पक्ष में आदेश पारित किया है। आयोग के निजी सचिव सुधांश सोनी ने बताया कि परिवादी कल्याण सिंह ने अप्रैल 2020 में एसबीआई में एक बचत खाता खुलवाया परिवादी द्वारा स्थानांतरित की गयी राशि 3800 रुपये एक ही खाता संख्या होने के कारण किसी अन्य खाते में स्थानांतरित हो गयी। जिसकी बैंक को तुरंत ई-मेल के जरिये सूचना दी गयी बार-बार मेल करने पर भी बैंक द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया न ही राशि पुन प्राप्त करने हेतु कोई प्रयास नहीं किया।जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष एवं पीठासीन अधिकारी पवन कुमार ओझा एवं सदस्य रमेश कुमार गौड़ ने उक्त प्रकरण की सुनवायी की पत्रावली में उपस्थित दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर पाया कि कल्याण सिंह ने अपने खाते से IFSC Code डालकर राशि स्थानांतरित की थी लेकिन तकनीकी अथवा बैंकिंग त्रुटि के कारण यह रकम बैंक ऑफ बड़ौदा मयूरपुर शाखा के अन्य खाते में चली गयी जो इन आपरेटिव था जिसकी जानकारी प्राप्त होते ही प्रार्थी ने बैंक को कई बार ई-मेल व अन्य माध्यमों से सूचित किया लेकिन बैंक द्वारा समय रहते कोई उचित कार्यवाही नहीं की गयी। जिला आयोग ने इस संबंध में रिजर्व बैंक के सर्कुलर दिनांक 18 फरवरी 2009 में पाया कि इन ओपरेटिव अकाउण्ट में लेन देन तृतीय पक्षकार द्वारा डेविट एवं क्रेडिट किसी ट्रांजेक्शन को किये जाने पर भी वह खाता ओपरेटिव हो सकता है। उपभोक्ता की स्वयं की गलती से गलत हस्तांतरित राशि को भी पुन उपभोक्ता को हस्तांतरित करवाने का पूर्ण दायित्व बैंक का था। जिसका निर्वहन नहीं कर बैंक द्वारा सेवादोष व लापरवाही बरती गयी। अत आयोग द्वारा बैंक को आदेशित किया गया कि वह परिवादी की गलत स्थानांतरित राशि रुपये 3800 रुपये परिवाद दर्ज होने की दिनांक से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से ता अदायगी व्याज सहित अदा करें। मानसिक परेशानी व परिवाद व्यय पेटे एकमुश्त 10000 रुपये अदा करे। उक्त आदेश की पालना निर्णय की तिथि से 45 दिन मे की जावें। 45 दिन में अदा नहीं करने पर सम्पूर्ण देय राशि पर ताअदायगी 9 प्रतिशत की दर से व्याज अदा करे। परिवादी द्वारा गलत हस्तांतरित राशि रुपये 3800 रुपये अप्रार्थी बैंक गलत हस्तांतरित खाताधारक की बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा मयुरपुर ब्रांच से प्राप्त करने हेतु स्वतंत्र रहेगी।
