मुनि श्री आदित्यसागरश्रुतसंवेगी महाश्रमण मुनि आदित्य सागर जी महाराज ने आरके कम्युनिटी सेंटर में शुक्रवार को प्रातः धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हर एक इंसान हर एक वस्तु हर एक क्षण कुछ ना कुछ सीखाता है। सीखने वाला सीखकर आगे बढ़ जाता है। जो नहीं सीख पाता वह अनुभव हीन होकर अपना जीवन व्यर्थ कर देता है। उन्होंने कहा कि सीखो सीखना बुरा नहीं है। जितना सीखोगे उतना बढ़ोगे। जितने अनुभवी के पास जाओगे उतना ही ज्यादा सीखोगे। उतनी ही उन्नति करोगे। लेकिन डिग्री के लिए सीखना बुरा है। लोग डिग्री के पीछे भाग रहे हैं ज्ञान के पीछे नहीं भाग रहे है। डिग्री कोई आपके ज्ञान का कोई प्रमाण पत्र नहीं है।आपका अनुभव आपके ज्ञान का प्रमाण पत्र है। जो योग्य हो वह चीज पढ़ो। जो योग्य नहीं है उसको पढ़ने से क्या फायदा। उन्होंने कहा कि हर परिस्थिति हर वक्त कुछ ना कुछ सीखाती है। अगर हमें सीखना है तो चींटी से मेहनत करना, मकड़ी से शिल्प कला, बगुले से युक्ति और शेर से अपनी ताकत का प्रयोग करना सीखने को मिलता है। उन्होंने चींटी के जीवन को संघर्षमय बताया। उन्होंने कहा कि चींटी कभी अपने लक्ष्य को पूरा करने में पीछे नहीं हटती है। वह संघर्ष करती हुई मंजिल प्राप्त करती है। कहां कि जीवन में संघर्ष है हार नहीं, जीवन में संघर्ष अनिवार्य है; यह हमें तोड़ता नहीं बल्कि तराशता है। जीवन में कभी संघर्ष से घबराएँ नहीं, उसे एक अवसर के रूप में देखें। अपनी हिम्मत को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाएँ। जब तक आप खुद हार नहीं मानते, तब तक दुनिया की कोई ताकत आपको हरा नहीं सकती। जो संघर्ष का डटकर सामना करते हैं वही जीवन में नई ऊंचाई को छूते हैं और सफल होते हैं। हर संघर्ष सार्थक होता है। संघर्ष से प्रज्ञा बढ़ती है, संघर्ष से हिम्मत बढ़ती है। संघर्ष से आपकी कीमत बढ़ती है और संघर्ष से ही अनुभव बढ़ता है।इससे पूर्व सभा में चित्रअनावरण, दीपप्रज्जवलन, पादप्रक्षालन, शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी मांगीलाल चिरंजीलाल रोहित मोहित झांझरी परिवार लिचाना वाले को मिला। मंगलाचरण निधि गदिया ने शानदार भजन प्रस्तुत कर किया। सायंकालीन श्रुत–समाधान एवं मुनि श्री की संगीतमय आरती की गई।इस दौरान पंचायत अध्यक्ष विनोद पाटनी, राजेश पांडया, बाबू गदिया, जीतू पाटनी, महावीर गंगवाल, चंद्र प्रकाश बैंद, राजीव गंगवाल, मुकेश काला, संदीप बोहरा, मुकेश सोनी, सुरेश काला,विजय गंगवाल, क
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