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Sat. Jan 17th, 2026

खटीमा का 108 साल पुराना ब्रिटिशकालीन स्कूल भवन बन सकता है राष्ट्रीय धरोहर

खटीमा में ब्रिटिशकाल के दौरान सन 1918 में स्थापित खटीमा मिडिल स्कूल एंड बोर्डिंग हाउस का ऐतिहासिक भवन जल्द ही राष्ट्रीय धरोहर के रूप में विकसित किया जा सकता है। थारू राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) परिसर में स्थित इस 100 वर्ष से अधिक पुराने भवन को संरक्षित करने के लिए शासन और प्रशासन स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

वर्तमान में थारू जीआईसी में 2.28 करोड़ रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण का कार्य प्रगति पर है। इसके तहत कॉलेज परिसर में आधुनिक ऑडिटोरियम, हाईटेक खेल मैदान के निर्माण के साथ-साथ पुराने कॉलेज भवन की मरम्मत की जा रही है। इसी क्रम में परिसर स्थित ब्रिटिशकालीन खटीमा मिडिल स्कूल के भवन को भी राष्ट्रीय धरोहर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।

इसको लेकर जिले के सीडीओ, सीईओ समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भवन का निरीक्षण किया जा चुका है। प्रधानाचार्य संतोष कुमार ने बताया कि वर्ष 1918 में खुले छह कक्षों वाले इस मिडिल स्कूल एंड बोर्डिंग हाउस का भवन आज भी बेहद मजबूत स्थिति में है। वर्तमान में इसी भवन में कक्षा छह से आठवीं तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। भवन से सटे दो-दो कक्षों की भी आधुनिक तकनीक से मरम्मत और सौंदर्यीकरण किया जाना प्रस्तावित है।

प्रधानाचार्य ने बताया कि सरकार की मंशा 100 वर्ष से अधिक पुराने मजबूत भवनों को संरक्षित कर उन्हें राष्ट्रीय धरोहर के रूप में विकसित करने की है। इसी योजना के तहत खटीमा मिडिल स्कूल के इस ऐतिहासिक भवन को भी चिन्हित किया गया है।

सीएम धामी का भी रहा है नाता

शिक्षक नरेंद्र सिंह रौतेला ने बताया कि वर्ष 1976 में थारू राजकीय इंटर कॉलेज का राजकीयकरण होने के बाद यहां कक्षा छह से 12वीं तक की पढ़ाई संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कक्षा नौ से 12वीं तक की शिक्षा इसी थारू जीआईसी से प्राप्त की है। इसी वर्ष फरवरी माह में मुख्यमंत्री ने कॉलेज परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान खटीमा मिडिल स्कूल के भवन को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में विकसित करने की बात कही थी।

प्रशासन का बयान

सीडीओ ऊधमसिंह नगर दिवेश शाशनी ने बताया कि थारू राजकीय इंटर कॉलेज में सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। परिसर स्थित खटीमा मिडिल स्कूल के पुराने भवन की भी आधुनिक तरीके से मरम्मत और संरक्षण किया जाएगा। इस दिशा में शीघ्र ही कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

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उपेन्द्र सिंह

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