शहडोल।
शहडोल जिले के ब्यौहारी विकासखंड अंतर्गत जन शिक्षा केंद्र तिखवा के शासकीय प्राथमिक विद्यालय डबरौहा से सामने आई तस्वीरें और जानकारी सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को उजागर करती हैं। जिस विद्यालय में नन्हे बच्चों को अक्षर ज्ञान मिलना चाहिए, वहां शिक्षक खुद पढ़ाने के बजाय लापरवाही और उदासीनता का परिचय दे रहे हैं।
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स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों के अनुसार, विद्यालय में पदस्थ एक शिक्षक नियमित रूप से कक्षा समय में सोते पाए जाते हैं, जबकि दूसरी शिक्षिका कुर्सी पर पैर रखकर मोबाइल फोन चलाने में व्यस्त रहती हैं। हैरानी की बात यह है कि पूरे विद्यालय में केवल दो ही शिक्षक पदस्थ हैं, और दोनों की यह स्थिति बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर डाल रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक समय पर विद्यालय तो आते हैं, लेकिन पढ़ाई के नाम पर कुछ भी नहीं होता। बच्चे कक्षा में बिना मार्गदर्शन के बैठे रहते हैं, न पाठ पढ़ाया जाता है और न ही अभ्यास कराया जाता है। इससे बच्चों की बुनियादी शिक्षा प्रभावित हो रही है।
सरकारी योजनाओं के तहत मिड-डे मील, किताबें और यूनिफॉर्म तो मिल रही हैं, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता पूरी तरह से गायब है। ऐसे में गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चे सबसे ज्यादा नुकसान झेल रहे हैं।
इस मामले को लेकर शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी एवं कलेक्टर द्वारा मामले की तत्काल जांच कर दोषी शिक्षकों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि विद्यालय में नियमित पढ़ाई शुरू हो सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि
जब शिक्षक ही अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे, तो सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार के दावे कैसे पूरे होंगे?
क्या जिम्मेदार अधिकारी इस लापरवाही पर संज्ञान लेंगे या बच्चों का भविष्य यूं ही नजरअंदाज होता रहेगा?

