जिला उज्जैन मध्य प्रदेश
संवाददाता अमन गुर्जर उज्जैन
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उज्जैन – विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान सुबह 4 बजे जैसे ही मंदिर के पट खुले, पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का विधिवत पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक हुआ। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान का अभिषेक संपन्न हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का भांग, चंदन, रजत चंद्र और मुकुट से दिव्य श्रृंगार किया गया। त्रिशूल, त्रिपुंड और रुद्राक्ष की माला अर्पित कर मस्तक पर रजत चंद्र, भांग-चंदन और गुलाब के पुष्पों से अलौकिक श्रृंगार किया गया। इसके पश्चात कपूर आरती की गई। ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर भस्म रमाई गई। भगवान को ड्रायफ्रूट और आभूषण अर्पित किए गए। भस्म अर्पण के पश्चात शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला एवं सुगंधित पुष्पों से सुसज्जित माला धारण कराई गई। बाबा महाकाल को गुलाब के सुगंधित पुष्प और फल-मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

