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जहाजपुर में राह-ए-हक फाउंडेशन द्वारा मजहब ए इस्लाम के चौथे खलिफा हजरत अली का जन्मदिन मनाया गया

जहाजपुर में हजरत अली के जन्मदिन पर उत्साह: परचम कुशाई, लंगर वितरण और मुबारकबाद का दौर

 

अतुल्य भारत चेतना (रियासत मलिक)

जहाजपुर: आज 3 जनवरी 2026, जो इस्लामी कैलेंडर के अनुसार 13 रजब का पवित्र दिन है, को इस्लाम के चौथे खलीफा और पहले इमाम हजरत अली इब्न अबी तालिब का जन्मदिन पूरी दुनिया में धूमधाम से मनाया गया। मुसलमान समुदाय इस अवसर को अपने-अपने तरीके से मनाते हैं, जिसमें घरों में दरूद-ए-पाक पढ़ना, फातिहा लगाना और उनके नाम पर इसाले सवाब करना प्रमुख है। इस्लाम की शिक्षाओं में हजरत अली को ज्ञान का समुद्र माना जाता है, जिनकी वीरता और शखावत आज भी दुनिया को प्रेरित करती है।

 

स्थानीय स्तर पर जहाजपुर में इस पवित्र दिन को विशेष उत्साह के साथ मनाया गया। तकिया मस्जिद स्थित मदरसे की छत पर ‘राह ए हक फाउंडेशन’ के बैनर के साथ मौला मुश्किल कुशा हजरत अली के जन्मदिन के मौके पर परचम कुशाई का आयोजन किया गया। इस दौरान समुदाय के सदस्यों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद दी और खुशी का इजहार किया। आयोजन का मुख्य आकर्षण लंगर का एहतमाम रहा, जिसमें फातिहा लगाने के बाद लंगर वितरित किया गया। यह आयोजन इस्लाम की एकता और भाईचारे की भावना को दर्शाता है, जहां लोग हजरत अली की शिक्षाओं को याद करते हुए एकजुट हुए।तकिया मस्जिद स्थित दरगाह मलंग सरकार के खादिम साजिद शाह ने एबीसी न्यूज नेटवर्क से बातचीत में कहा, “आज इस्लाम के चौथे खलीफा, हमारे पैगंबर हजरत मुहम्मद (स.अ.व.) के दामाद और चचेरे भाई हजरत अली का जन्मदिन है। हम उनकी खुशी में यह जश्न मना रहे हैं। हजरत अली इल्म का वो दरिया हैं कि दुनिया की सारी कलम की स्याही और खाली पन्ने खत्म हो जाएंगे, लेकिन उनका इल्म लिखने में कभी कम नहीं पड़ेगा। उन्होंने मजहब-ए-इस्लाम को ऐसी-ऐसी जंगों में फतह दिलाई जो नामुमकिन लगती थीं। अल्लाह ने उन्हें ऐसी ताकत से नवाजा कि दुनिया की सारी ताकतें उनके सामने फीकी पड़ जातीं।”साजिद शाह ने आगे हजरत अली की वीरता का जिक्र करते हुए बताया, “जंग-ए-खैबर में फतह हासिल करने के बाद दुश्मन का सर धड़ से अलग होते ही उन्होंने जो नारा लगाया, वह मजहब-ए-इस्लाम के तमाम मर्द-ए-मुजाहिदों के लिए जंग की शुरुआत का सबब बन गया। वह नारा आज भी पूरी दुनिया के मुसलमान लगाते हैं: ‘नारा-ए-तकबीर… अल्लाहु अकबर!’ उनकी शहादत के इतने अरसे गुजरने के बाद भी उनका इल्म, शखावत, ताकत और कुव्वत दुनिया को याद है।”इस आयोजन में कई मुस्लिम नौजवान और समुदाय के सदस्य शामिल हुए, जिनमें जिशान पठान, साजिद मदारी, अशफाक शाह, एडवोकेट मुतल्लिब नेब, समीर मलिक, इदरीस अंसारी, सकलेन मुस्तफा, रिजवान मंसूरी, फैजान पठान, जिशान शाह और अन्य कई लोग प्रमुख थे। आयोजन ने जहाजपुर में धार्मिक सद्भाव और एकता की मिसाल पेश की, जहां लोग हजरत अली की शिक्षाओं से प्रेरित होकर अपने दैनिक जीवन में अमल करने का संकल्प लेते नजर आए।यह जन्मदिन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह इस्लाम की मूल भावनाओं—ज्ञान, न्याय और वीरता—को जीवंत रखने का माध्यम भी है। समुदाय के सदस्यों ने उम्मीद जताई कि ऐसे आयोजन आगे भी जारी रहेंगे, ताकि नई पीढ़ी हजरत अली की विरासत से जुड़ सके।

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न्यूज डेस्क राजस्थान

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