अमर बलिदानी, वीर साहिबजादों के उपकारों का ऋण हम कभी चुका नहीं सकते- हरि बोल
संवाददाता मनमोहन गुप्ता भरतपुर
इसे भी पढ़ें (Read Also): मुख्यमंत्री जी को विधानसभावार पांच वर्षीय कार्यो की रूपरेखा से विधायको ने अवगत करायाविदिशा, दिनांक 11 जुलाई 2024
डीग – डीग जिले के कस्बा कामां कामवन विमल कुंड स्थित श्री हरि कृपा आश्रम में वीर बाल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में जिसमें आश्रम के संस्थापक एंव श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का प्रकाश उत्सव दिव्य प्रेरणा, संदेशों व उपदेशों का संचार करता है। श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज, गुरु तेग बहादुर अन्य सभी गुरुओं व अमर बलिदानी, वीर साहिबजादों के उपकारों का ऋऋण हम कभी चुका नहीं सकते व उनके अमर बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके जैसा अदम्य साहस, वीरता, शौर्य व पराक्रम अन्यत्र देखने को नहीं मिलेगा। छोटी सी अवस्था में बिना घबराए मुगल सल्तनत के सामने अडिग खड़े रहकर उन क्रूर आततायियों के दिल को भी दहला दिया था। इन वीर अमर बलिदानियों के अमर इतिहास से प्रेरणा लेकर राष्ट्र व धर्म के प्रति हम सभी के मन में समर्पण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के लिए गुरु गोविंद सिंह जी महाराज व दसों गुरुओं के महान योगदान को सनातन हिन्दू धर्म जन्दिा दीवारों में चिनवा दिए गए फिर स भी अपने धर्म का परित्याग नहीं किया अ । श्री महाराज जी ने जब उनका इतिहास सुनाया तो सभी की आँखों में व आँसू बहने लगे। भाव विभोर होकर उपस्थित विशाल समुदाय ने गुरु गोविंद सिंह जी के सहाबजादों की शहादत पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। महाराज श्री ने अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए सभी को जागरूक होने का भी संदेश दिया। ब्रज के द्वादश वनों में पंचम प्रमुख वन कामवन का पौराणिक व ऐतिहासिक नाम पुनः स्थापित करने के चल रहे अभियान की प्रशंसा एवं समर्थन किया। श्री महाराज जी तो प्रारंभ से ही कामवन धाम की जय जयकार करते हुए पूरे विश्व में अपने पावन जन्मस्थली का प्रचार प्रसार करते रहे हैं।
संपूर्ण वातावरण श्री गुरु महाराज, कामां के कन्हैया, लाठी वाले भैय्या एवं कामवान धाम की जय जय कर से गूंज उठा। सभी ने श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज एवं अदम्य साहस के प्रतीक वीर अमर बलिदानी साहिबजादों को व नमन किया।

