शहडोल।
सोन नदी पर निर्माणाधीन पुल अब विकास का नहीं, बल्कि किसानों की फसलों को रौंदने और नियमों को कुचलने का प्रतीक बनता जा रहा है। शहडोल जिले के अंतिम छोर पपौंध क्षेत्र में सोन नदी पर बनाए जा रहे पुल निर्माण के दौरान श्रीराम कंस्ट्रक्शन कंपनी, खेड़िया के ठेकेदारों और कर्मचारियों की मनमानी खुलकर सामने आ रही है।
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ग्राम पंचायत बरा बघेलहा अंतर्गत कंपनी द्वारा किसानों को पैसे का लालच देकर उनकी खड़ी फसलों को कुचलते हुए अपना कैंप स्थापित किया जा रहा है। खेतों में तैयार फसल को बिना विधिवत अनुमति और लिखित सहमति के बर्बाद किया जा रहा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
जब इस संबंध में कंपनी के कर्मचारियों से सवाल किया गया तो उन्होंने एग्रीमेंट होने का दावा तो किया, लेकिन किसी भी प्रकार का लिखित प्रमाण दिखाने में पूरी तरह असफल रहे। इससे साफ होता है कि या तो एग्रीमेंट है ही नहीं, या फिर किसानों को गुमराह किया जा रहा है।
चिंता की बात यह है कि जब निर्माण की शुरुआती अवस्था में ही ठेकेदारों का यह रवैया है, तो आगे चलकर पैसे के लालच में किसानों को और भी बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया जा सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार बेखौफ होकर काम कर रहे हैं, मानो उन्हें किसी कार्रवाई का डर ही न हो।
इतना ही नहीं, सूत्रों की जानकारी से पुल निर्माण में उपयोग की जा रही रेत भी अवैध रूप से नदियों से निकाली जा रही है, जिसकी कोई डीपी या रॉयल्टी कर्मचारियों के पास नहीं थी जबकि नियमता कंपनी द्वारा रॉयल्टी से कंपनी द्वारा रेत खरीदने का प्रावधान ह लेकिन खनिज नियमों और पर्यावरण कानूनों का खुला उल्लंघन है। अवैध रेत उत्खनन से न सिर्फ नदी का अस्तित्व खतरे में है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ठेकेदार द्वारा फसल नष्ट करने की जांच कराई जाए
अवैध रेत उत्खनन पर सख्त कार्रवाई हो
किसानों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए
और दोषी ठेकेदार व कर्मचारियों पर त्वरित व कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कब जागता है, या फिर विकास के नाम पर किसानों की मेहनत यूं ही रौंदी जाती रहेगी।

