Breaking
Wed. Jan 14th, 2026

26 साल बाद भी नहीं लगी रिफाइनरी, किसानों को लौटाई जाए उनकी जमीन:

26 साल बाद भी नहीं लगी रिफाइनरी, किसानों को लौटाई जाए उनकी जमीन:

संवाददाता आमिर मिर्ज़ा 

शंकरगढ़, बारा, के (प्रयागराज) जिले की बारा तहसील अंतर्गत लोहगरा और आसपास के दर्जनभर गांवों में करीब 25 वर्ष पहले रिफाइनरी लगाने के नाम पर किसानों से अधिग्रहित की गई हजारों एकड़ जमीन आज भी बेकार पड़ी है। न रिफाइनरी बनी, न वादा किया गया रोजगार मिला। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब परियोजना ही नहीं लगी, तो किसानों को उनकी जमीन क्यों नहीं लौटाई जाती?

 *जमीनें चली गईं, भविष्य अंधेरे में*

जिन किसानों ने सरकारी भरोसे पर अपनी पुश्तैनी और उपजाऊ कृषि भूमि दी थी, वे आज रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उस समय कहा गया था कि रिफाइनरी से क्षेत्र का विकास होगा, युवाओं को नौकरी मिलेगी और पलायन रुकेगा।

लेकिन 26 साल बीतने के बाद भी न तो रिफाइनरी लगी और न ही रोजगार का कोई रास्ता खुला।

*इन गांवों की गई जमीन*

इस परियोजना के लिए लोहगरा, भोडी, कपारी, अमिलिहाई, दुबहा, खान सेमरा, चक अतरी, कपसो अतरी, मदनपुर, शिवराजपुर, बेरुई, मलापुर, लौंदखुर्द सहित कई गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई थी।

करीब 3500 एकड़ भूमि और 1300 से अधिक किसान परिवार इस फैसले से प्रभावित हुए।

*किसानों की जमीन पर उद्योगों की घेराबंदी*

किसानों का दर्द तब और गहरा हो जाता है जब वे देखते हैं कि —

कहीं सोलर प्लांट लग रहा है

कहीं पावर प्लांट खड़ा हो गया कहीं सीमेंट प्लांट की चिमनियां चल रही हैं

कहीं डिसलेरी प्लांट से पानी की बोतलें निकल रही हैं, कहीं सिलिका कंपनी लग गई, कहीं अन्य छोटे बड़े उद्योग लग गए लेकिन जिन किसानों की जमीन रिफाइनरी और अन्य उद्योगों के नाम पर ली गई, उनके हिस्से में न उद्योग आया, न नौकरी, न जमीन वापस मिली।

*खेती छूटी, मजदूरी मजबूरी बनी*

जमीन छिनने के बाद कई किसान मजदूर बन गए, कई परिवार पलायन को मजबूर हुए। जिन खेतों से कभी अन्न निकलता था, आज वहां झाड़ियां, सन्नाटा और सरकारी बोर्ड लगे हैं।रोटी कमाने पर भी कार्रवाई की जाती है। किसानों का आरोप है कि “जमीनें चली गईं, रिफाइनरी लगी नहीं, रोजगार मिला नहीं। अब भूखे, बेरोजगार और परेशान किसान जब अपनी ही छीनी गई जमीन पर रोजी-रोटी के लिए गिट्टी-पत्थर निकाल कर पेट भरना चाहता है तो उसे अवैध बताकर कार्रवाई कर दी जाती है।” किसानों का सवाल है कि आख़िर किसान-मजदूर जाएँ कहाँ? खाएँ क्या? और इस अन्याय का हल कौन और कब निकालेगा? किसानों की मांग

प्रभावित किसानों की मांग साफ है या तो तुरंत रिफाइनरी परियोजना शुरू की जाए और पावर प्लांट, सोलर प्लांट, सीमेंट प्लांट आदि के लिए ली गई पर उन्हें रोजगार दिया जाय 

या फिर अधिग्रहित जमीन किसानों को वापस की जाए,

साथ ही 25 वर्षों के नुकसान का न्यायोचित मुआवजा दिया जाए।

*सरकार और प्रशासन से सवाल*

*कई बार हुआ प्रदर्शन, संसद में भी उठी मांग, नहीं निकला हल*

रिफाइनरी बनाने और न बनने पर किसानों की जमीन वापस करने के लिए कई बार स्थानीय किसान जनप्रतिनिधियों , प्रशाशन , सरकार और जंतर मंतर पर प्रदर्शन तक कर चुके हैं । कई बार पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से भी आश्वासन दिया गया। यहां तक की संसद में भी रिफाइनरी बनाने और न बनने की स्थिति में किसानों को जमीन लौटाने की बात उठाई गई लेकिन आज तक कोई हल नहीं निकल गया जिससे किसान मायूस हैं। *यह मामला केवल जमीन का नहीं, बल्कि विश्वास, आजीविका और इंसाफ का है। अगर अब भी फैसला नहीं हुआ, तो यह अधिग्रहण किसानों के साथ किया गया सबसे बड़ा धोखा माना जाएगा।

Author Photo

News Desk

Responsive Ad Your Ad Alt Text
Responsive Ad Your Ad Alt Text

Related Post

Responsive Ad Your Ad Alt Text