जैसलमेर।(सी आर देवपाल जैसलमेर)।
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100 वर्षों तक गुप्त रखे गए सोमनाथ मंदिर शिवलिंग के अवशेष, हजारों साल पहले महमूद गजनवी द्वारा खंडित किये जाने के बाद मंगलवार 23 को साय 5 बजे जवाहर पैलेस में आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा साक्षात दर्शन करवाये जायेंगे।
महमूद गजनवी के आक्रामण के बाद कुछ पुजारियों ने खंडित शिवलिंग के अवशेष को संरक्षित कर लिया था जो अब 100 वर्षों बाद सबके सामने आया है।
हजार साल पहले जब महमूद गजनवी ने भारत पर आक्रमण किया तो उसने कई धार्मिक स्थलों को नष्ट कर दिया जिनमें से एक था सबसे पूजनीय ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर। अपने 18वें आक्रमण में उसने उस शिवलिंग को नष्ट कर दिया जो 3 फुट ऊँचा था और जो गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देते हुए ज़मीन से 2 फुट ऊपर हवा में स्थिर था। अब इस शिवलिंग का अवशेष सामने आया है जो एक कार्यक्रम के दौरान एक पुजारी ने दुनिया के सामने सच बताया है।
*शंकराचार्य ने दिया था निर्देश*
पुजारी ने कार्यक्रम में बताया कि महमूद गजनवी के आक्रमण के बाद कुछ अग्निहोत्री पुजारियों ने उस खंडित लिंग के टुकड़ों को अपने पास रख ले लिये और उन्हीं में से एक परिवार ने उन टुकड़ों को एक नए शिवलिंग के रूप में गढ़ा और कई पीढ़ियों तक उसकी पूजा की। साल 1924 में, तत्कालीन शंकराचार्य ने उस परिवार को निर्देश दिया कि वे इसे 100 वर्षों तक गुप्त रखें और इसकी उपासना जारी रखें। अब वर्तमान शंकराचार्य ने इस पुजारी परिवार को मार्गदर्शन दिया है कि वे इस शिवलिंग को आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी को सौंप दे जिले की मुख्य शिक्षिका अंजू गर्ग ने बताया कि पुजारी अ सीताराम शास्त्री के अनुसार वर्तमान शंकराचार्य के निर्देशानुसार बेंगलुरु में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी से मिलने भेजा गया। इस महान कार्य सोमनाथ में लिंग की पुन प्रतिष्ठा को संपन्न करने के लिए उन्हें चुना गया है। बता दें कि सीताराम शास्त्री उस पुजारी के घराने से हैं जिन्होंने इस पावन शिवलिंग के टुकड़ों को संरक्षित किया है। वर्तमान पीढ़ी के पुजारियों में वे पिछले 21 सालों से इस लिंग के संरक्षक बने हुए हैं।
संस्था के मीडिया प्रमुख बाबू लाल शर्मा के अनुसार साय 5 बजे से रुद्राभिषेक होगा उसके बाद 7 बजे तक आम जन दर्शन कर सकेंगे।

