हल्द्वानी शहर के कुसुमखेड़ा क्षेत्र में स्थित राधिका ज्वैलर्स में शुक्रवार रात हुई करोड़ों की चोरी के पीछे चोरों की सुनियोजित और पेशेवर साजिश सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह ने इस वारदात को अंजाम देने से पहले कई महीनों तक रेकी की और फिर 40 दिन पहले ज्वैलरी शोरूम से सटी दुकान किराये पर लेकर पूरे प्लान को अमल में लाया।
किराये की दुकान बनी चोरी का अड्डा
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गिरोह के एक सदस्य ने ज्वैलर नवनीत शर्मा की दुकान के ठीक बगल में रहने वाले गौरव बिष्ट से संपर्क कर उनकी खाली दुकान किराये पर ली। आरोपी ने अपना नाम जनकराम जोशी, निवासी हल्द्वानी बताया और एडवांस के रूप में 10 हजार रुपये देकर दुकान की चाबी ले ली। इसके बाद 30 नवंबर को 5 हजार रुपये और दिए गए।
कारीगर बनकर आते-जाते रहे आरोपी
शक से बचने के लिए गिरोह के अन्य सदस्य पीओपी कारीगर और कारपेंटर बनकर रोज दुकान में आते-जाते रहे। दुकान में पहले पीओपी कराया गया, फिर रंगाई-पुताई की गई और प्लाई से रैक आदि तैयार किए गए। पेशेवर तरीके से काम होने के कारण आसपास के दुकानदारों को उनकी गतिविधियों पर कोई संदेह नहीं हुआ।
वेल्डिंग मशीन से काटी दीवार
साप्ताहिक बंदी से एक रात पहले चोरों ने मौका पाकर किराये की दुकान और ज्वैलर्स के बीच स्थित दीवार को लोहे के औजार और वेल्डिंग मशीन की मदद से काटा। इसके बाद वे आराम से दुकान के अंदर घुसे और सोने-चांदी के कीमती जेवरात समेटकर फरार हो गए।
सत्यापन में भारी लापरवाही
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि दुकान किराये पर देने से पहले न तो आधार कार्ड लिया गया और न ही पुलिस सत्यापन कराया गया। 40 दिनों तक किरायेदार की कोई जांच नहीं की गई, जो इस बड़ी वारदात की एक अहम कड़ी मानी जा रही है।
ये सवाल अब भी बने हुए हैं
रात के सन्नाटे में ड्रिल और वेल्डिंग की आवाज किसी ने क्यों नहीं सुनी?
साप्ताहिक बंदी के बावजूद दुकान में एक करोड़ से अधिक के जेवर क्यों छोड़े गए?
मुखानी थाने से महज दो किलोमीटर दूरी पर पुलिस गश्ती दल को संदिग्ध ऑटो क्यों नहीं दिखा?
रात तीन बजे रोडवेज बस न मिलने पर आरोपी आखिर कहां और कैसे गए?
बाहरी आरोपी 40 दिन तक शहर में कहां रुके?
पुलिस की कार्रवाई तेज
चोरी के बाद एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने हाईलेवल मीटिंग कर मामले के जल्द खुलासे के निर्देश दिए हैं।
पांच विशेष टीमें गठित की गई हैं
एक टीम सीसीटीवी फुटेज के जरिये आरोपियों की लोकेशन ट्रेस कर रही है
दूसरी टीम हिरासत में लिए गए संदिग्धों से पूछताछ कर रही है
डॉग स्क्वायड, एसओजी और 6 फोरेंसिक टीमें वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच में जुटी हैं
एसएसपी ने कहा कि पूरे ऑपरेशन की जिम्मेदारी एसपी सिटी को सौंपी गई है और जल्द ही चोरी का खुलासा किया जाएगा।

