बालू बंदी ने प्रयागराज को भुखमरी की आग में झोंका, मजदूरों का उग्र आंदोलन तय:
अधिकारियों की चुप्पी पर फूटा गुस्सा, बारा से लेकर पूरे प्रयागराज में घेराव की चेतावनी:
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संवाददाता आमिर मिर्ज़ा
प्रयागराज/कौशांबी। बालू खनन बंदी ने प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों में हाहाकार की स्थिति पैदा कर दी है। रविवार को कौशांबी में हुए प्रशासनिक घेराव के बाद अब मजदूरों ने ऐलान कर दिया है कि बहुत जल्द बारा तहसील से लेकर पूरे प्रयागराज क्षेत्र के संबंधित अधिकारियों का घेराव किया जाएगा। मजदूरों का आरोप है कि शासन-प्रशासन की लापरवाही और अधिकारियों की मिलीभगत ने करोड़ों लोगों को भुखमरी की कगार पर ला खड़ा किया है। मजदूरों ने सीधे तौर पर सवाल खड़ा किया है कि योगी सरकार के सुशासन में मजदूर आखिर क्यों बेरोजगारी से तड़प रहा है। प्रयागराज क्षेत्र के तमाम इलाकों में खनन ही एकमात्र सहारा है, जो परंपरागत रूप से नाव के माध्यम से किया जाता रहा है। इसी नाव से मजदूरों के घरों का चूल्हा जलता रहा है, बच्चों की पढ़ाई और परिवार का जीवन यापन चलता रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि पिछले 5 से 6 वर्षों से नाव से बालू खनन पूरी तरह बंद है। मजदूरों का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है, जबकि मशीनों से खनन कराने वालों को खुली छूट दी जा रही है। इससे एक ओर नदियों का सीना छलनी हो रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय मजदूर बेरोजगारी, भुखमरी और पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अधिकारी कुर्सियों में बैठे रहकर फाइलों में खेल कर रहे हैं, उन्हें न मजदूरों की भूख दिख रही है और न ही उनके परिवारों की बदहाली। अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में प्रयागराज क्षेत्र एक बड़े जन आंदोलन का गवाह बनेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन- प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की होगी। मजदूर संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही नाव से बालू खनन शुरू नहीं कराया गया और मजदूरों को रोजगार नहीं मिला, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी गूंज तहसील से लेकर जिला और मंडल स्तर तक सुनाई देगी।

