संवाददाता – दिलीप कुमार एबीसी न्यूज नेटवर्क (अतुल्य भारत चेतना)
जनपद बस्ती के दक्षिण दरवाजा (अस्पताल रोड) स्थित लाइफ लाइन अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है। मात्र 40 दिन के अंदर अस्पताल में दूसरी नवजात शिशु की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल के बाहर जमकर हंगामा किया। परिजनों ने डॉक्टर व अस्पताल प्रबंधन पर गलत इलाज, हेवी डोज देने, जबरन 14 दिन तक भर्ती रखने और कमीशन के लालच में मासूम की जान लेने का गंभीर आरोप लगाया है।
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बच्चा जन्म के समय पूरी तरह स्वस्थ था : पीड़ित पिता
मृतक नवजात के पिता ने बताया कि उनका बच्चा पीएमसी हॉस्पिटल में नॉर्मल डिलीवरी से हुआ था और जन्म के समय पूरी तरह स्वस्थ था। ऑपरेशन के बाद भी बच्चे की हालत सामान्य थी, लेकिन पीएमसी हॉस्पिटल की संचालिका डॉ. रेनू राय ने “गंदा पानी पीने से पीलिया हो गया” बताकर बच्चे को लाइफ लाइन अस्पताल में रेफर कर दिया।
पिता का आरोप है कि रेफरल के पीछे मोटा कमीशन था। लाइफ लाइन अस्पताल में बच्चे को 14 दिन तक जबरन भर्ती रखा गया, भारी-भरकम बिल बनाए गए और गलत इलाज-हेवी डोज देने के कारण अंततः बच्चे की मौत हो गई।
सीज होने के बावजूद कैसे चल रहा है अस्पताल
सबसे गंभीर सवाल यह है कि लाइफ लाइन अस्पताल के संचालक डॉ. तारिक एहसन पर पहले भी लापरवाही व गलत इलाज के कई मामले दर्ज हैं। पूर्व में गंभीर शिकायतों पर यह अस्पताल सीज भी किया जा चुका है। फिर भी मात्र कुछ ही दिनों में अस्पताल दोबारा चालू हो गया।
स्थानीय लोगों व परिजनों का सीधा आरोप है कि यह सब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMHO) के संरक्षण में हो रहा है, जिसके चलते मानकविहीन निजी अस्पताल खुलेआम मनमानी कर रहे हैं।
परिजनों की मांग
- डॉ. तारिक एहसन व लाइफ लाइन अस्पताल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हो
- अस्पताल को तत्काल सील किया जाए और लाइसेंस रद्द हो
- कमीशनखोरी के पूरे रैकेट की उच्चस्तरीय जांच हो
- पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा मिले
परिजनों ने पुरानी बस्ती थाने में लिखित तहरीर दे दी है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला तो वे जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करेंगे और लखनऊ जाकर स्वास्थ्य मंत्री से मिलेंगे।
अब तक कोई कार्रवाई नहीं
घटना की सूचना मिलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। जनपद में मानकविहीन निजी अस्पतालों का यह सिलसिला लगातार जारी है और नौनिहालों की जान की कीमत पर कमीशन का खेल फल-फूल रहा है।
सवाल यही है – आखिर इन “यमराज बने प्राइवेट हॉस्पिटलों” पर सख्त कार्रवाई कब होगी?

