आईओसीएल-एचपीसीएल की संयुक्त मॉक ड्रिल में परखी गई आपदा प्रबंधन क्षमता

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मथुरा | अतुल्य भारत चेतना, दिनेश सिंह तरकर
मथुरा। राष्ट्रीय संपत्ति तेल पाइपलाइनों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) तथा हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने सोमवार देर रात मथुरा जनपद के ग्राम अगनपुरा में एक भव्य संयुक्त मॉक ड्रिल का आयोजन किया।

यह अभ्यास विशेष रूप से रात्रिकालीन इसलिए कराया गया ताकि अंधेरे में आपातकालीन प्रतिक्रिया (नाइट रिस्पॉन्स), त्वरित तत्परता तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की वास्तविक परीक्षा ली जा सके।

मॉक ड्रिल में तेल रिसाव एवं भीषण आगजनी की काल्पनिक आपात स्थिति बनाई गई, जिस पर दोनों कंपनियों की टीमों ने सफलतापूर्वक नियंत्रण प्राप्त कर अपनी तैयारियों का जीवंत प्रदर्शन किया। इस दौरान मौके पर मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों में भी पाइपलाइन सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन को लेकर जागरूकता बढ़ी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसपी सिटी मथुरा राजीव कुमार सिंह ने आईओसीएल व एचपीसीएल टीमों के उत्कृष्ट समन्वय, मजबूत संचार व्यवस्था तथा पाइपलाइन सुरक्षा के प्रति गंभीरता की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा, “तेल पाइपलाइनें देश की जीवन रेखाएं हैं। हर गांव में आपातकालीन समिति का गठन और ग्रामीणों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई हो सके।”

संयुक्त मॉक ड्रिल का संचालन एवं नेतृत्व आईओसीएल के डीजीएम बी.पी. पोद्दार तथा एचपीसीएल के डीजीएम सुदीप घोष ने किया। दोनों अधिकारियों ने ग्रामीणों को पाइपलाइन के ऊपर अवैध निर्माण न करने, किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत सूचना देने तथा राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा में सहयोग करने की अपील की।

इस रात्रिकालीन महाअभ्यास का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में तेल पाइपलाइन सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा वास्तविक आपात स्थिति में त्वरित, समन्वित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना था। अभ्यास पूरी तरह सफल रहा और सभी एजेंसियों ने अपनी तैयारियों को सिद्ध किया।
तेल रिसाव (Oil Spill) आपदा प्रबंधन – संपूर्ण जानकारी

1. तेल रिसाव के प्रमुख कारण
- पाइपलाइन में छेद या दरार (चोरी का प्रयास, जंग, भूकंप आदि)
- वाल्व/फ्लैंज फटना या लीकेज
- टैंकर दुर्घटना (सड़क/रेल/समुद्र)
- मानवीय भूल या तोड़-फोड़ (सबोटाज)
2. तेल रिसाव के तत्काल प्रभाव
- आग का भयानक खतरा (ज्वलनशील होने से)
- मिट्टी व भूजल प्रदूषण
- नदी/नहर/तालाब में फैलने पर जल स्रोत दूषित
- फसलों, पशुओं और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर असर
- वायु में विषैले धुएँ का फैलाव
3. तेल रिसाव आपदा प्रबंधन के चरण (Standard Response Protocol)
A. त्वरित प्रतिक्रिया (पहले 0-30 मिनट)
- सबसे पहले सुरक्षित दूरी पर जाएँ
- तुरंत सूचना दें:
- IOC/HPCL/BPCL आपात नंबर: 1800-111-366 (टोल-फ्री)
- पुलिस: 112
- फायर ब्रिगेड: 101
- जिला आपदा प्रबंधन: 1077
- सिगरेट/माचिस/मोबाइल स्विच ऑन-ऑफ न करें (चिंगारी से विस्फोट का खतरा)
- हवा की दिशा के विपरीत भागें
B. प्रथम चरण – नियंत्रण (पहले 1-4 घंटे)
- पाइपलाइन कंपनी की QRT (Quick Response Team) मौके पर पहुँचती है
- लीकेज पॉइंट को बंद करने के लिए वाल्व शट-डाउन
- आग बुझाने के लिए फोम कंपाउंड का प्रयोग
- बूम (Boom) लगाकर तेल को फैलने से रोका जाता है
- सक्शन पंप से बचा हुआ तेल टैंकर में भरा जाता है
C. द्वितीय चरण – सफाई एवं पुनर्वास
- दूषित मिट्टी को खोदकर हटाया जाता है
- बायो-रेमेडिएशन (जीवाणु द्वारा तेल को खाकर साफ करना)
- प्रभावित परिवारों को राहत एवं मुआवजा
4. ग्रामीणों के लिए क्या करें – क्या न करें
करें:
- पाइपलाइन के ऊपर कोई निर्माण न करें
- पाइपलाइन के 10 मीटर के दायरे में खेती न करें
- कोई संदिग्ध व्यक्ति/खुदाई दिखे तो तुरंत सूचना दें
- गाँव में आपातकालीन समिति बनाएँ
न करें:
- लीकेज देखकर माचिस/लाइटर जलाएँ
- लीक तेल को इकट्ठा करने की कोशिश करें
- ट्रैक्टर/जेनसेट पास में चलाएँ
5. महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर (24×7)
- IOC: 1800-111-366
- HPCL: 1800-2333-555
- BPCL: 1800-22-4344
- राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF): 011-23438091 / 9711077372
- पुलिस कंट्रोल रूम: 112
तेल पाइपलाइन राष्ट्र की जीवनरेखा है। इसकी सुरक्षा में आपकी सतर्कता सबसे बड़ा योगदान है।

