धौरहरा मठ में गूंजी भक्ति की धुन, व्यासपीठ से सुनाई तुलसी–राम कथा
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धौरहरा (खीरी)।संत फकीर दास स्मारक मठ परिसर में जारी धार्मिक आयोजन के तीसरे दिन कथा व्यास व्याकरणाचार्य पंडित गरुड़ध्वज बाजपेई ने अपने आध्यात्मिक प्रवचन से भक्तों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही।
दक्ष प्रजापति का प्रसंग सुनाते हुए पंडित बाजपेई ने कहा कि पद और प्रतिष्ठा मिलने के बाद राजा दक्ष में अहंकार पैदा हो गया, जिसके चलते उन्होंने देवाधिदेव महादेव का तिरस्कार करवाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि बातों के बाण सबसे घातक होते हैं और उनसे बचने के लिए भोलेनाथ की शरण सर्वोत्तम उपाय है।
कथा के दौरान उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की जीवन कथा का मार्मिक वर्णन किया और प्रसिद्ध दोहा चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़, तुलसीदास चंदन घिसे तिलक देय रघुवीर का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताया कि किस प्रकार पत्नी रत्नावली के उपदेश ने तुलसीदास का जीवन बदल दिया। उनकी प्रेरणा से ही तुलसीदास ने अपना संपूर्ण जीवन भगवान राम की भक्ति को समर्पित किया और ‘रत्नावली’ ग्रंथ की रचना की।
रविवार को कथा के अगले सत्र में उन्होंने देव प्रसन्नता की सरल विधि बताते हुए कहा कि एक रोटी के पांच टुकड़े कर दाल–सब्जी में अलग-अलग मिलाकर पांच देवी-देवताओं के नाम से स्वाहा बोलने पर देव प्रसन्न होते हैं। इससे व्यक्ति और परिवार पर दिव्य कृपा बनी रहती है।
धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण वातावरण में कथा का रसपान किया और मठ परिसर पूरे दिन भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर रहा।

