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Sat. Jan 17th, 2026

राजस्थान मृत शरीर सम्मान अधिनियम के नियम लागू करने वाले देश का पहला राज्य बना

संवाददाता –जितेन्द्र कुमार
अतुल्य भारत चेतना

शव के साथ प्रदर्शन पर रोक, 24 घंटे में अंतिम संस्कार जरूरी नहीं तो पुलिस कब्जे में लेकर करवा सकेगी

जयपुर, राजस्थान। सड़क पर सब रख कर प्रदर्शन को कानूनी अपराध माने जाने वाले राजस्थान मिर्च शरीर सम्मान अधिनियम के नियमों को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है अब कार्यपालक मजिस्ट्रेट के नोटिस के बावजूद प्रदर्शनकारी परिजन सब का 24 घंटे में अंतिम संस्कार नहीं करते हैं तो पुलिस कब्जे में लेकर करवा सकेगी सब को सड़क या अन्य किसी स्थान पर रखकर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ छह माह से 5 साल तक की सजा का प्रावधान है गौरतलाप है कि राज्य में आए दिन सब रखकर मांगों को पूरा करने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए 2 साल पहले कांग्रेस की सरकार ने यह कानून बनाया था ।

पूर्व सरकार अशोक गहलोत सरकार ने 20 जुलाई 2023 को विधानसभा में अधिनियम पारित किया था ।

  • राज्यपाल से 17 अगस्त को अधिनियम को मंजूरी दी और सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर दी कानून प्रभावी हो गया था, लेकिन नियम नहीं बने थे ।
  • नियम नहीं बनने से शवों के अंतिम संस्कार, अनुसंधान एवं प्रकरण में चालान पेश करने की प्रक्रिया में दिक्कतें आ रही थी ।
  • परिजनों को नोटिस कार्यपालक मजिस्ट्रेट तामील करवाएंगे यह विदेशी संदेशवाहक ईमेल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजा जा सकेगा ।
  • ऐसा कानून बनाने व लागू करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है ।
    *इस नियम के तहत सजा के चार बड़े प्रावधान रखे गए हैं –
  1. परिवार के सदस्य शव का उपयोग प्रदर्शन करने के लिए करता है या अन्य व्यक्ति को विरोध करने के लिए अनुमति देता है तो परिजन को 2 साल तक की जेल या जुर्माने की सजा होगी ।
  2. परिवार से अलावा कोई व्यक्ति शव का उपयोग विरोध प्रदर्शन करने के लिए करता है तो 6 माह से 5 साल तक की सजा या जुर्माना हो सकता है
  3. राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला में लावारिस शवों का जेनेटिक डाटा सुरक्षित रखा जाएगा । डाटा लीक करने वाले दोषी कर्मचारी या अधिकारी को तीन से 10 साल तक की सजा हो सकेगी ।
  4. मृतक के परिजन अगर शव को कब्जे में नहीं लेते हैं तो 1 साल तक की सजा या जुर्माना या फिर दोनों हो सकता है।
    अस्पतालों पर भी नियम लागू
    बकाया बिल पर भी अस्पताल नहीं रोक सकेंगे शव,अस्पताल प्रशासन बिलों का भुगतान नहीं करने के आधार पर शव को अस्पताल में नहीं रख सकेगा । अस्पतालों को परिवार या सार्वजनिक प्राधिकरण को सम्मानजनक तरीके से शवों को सौंपना होगा । ध्यान रखें कि –
    राजस्थान में मृत शरीर बोर्ड नाम का कोई अलग बोर्ड नहीं है, बल्कि मृत शरीर के सम्मान और उचित प्रबंधन से जुड़ा एक कानून है, राजस्थान विधानसभा ने राजस्थान मृत शरीर सम्मान विधायक 2023 पारित किया है , जिसका उद्देश्य मृत शरीर के सम्मान को बनाए रखना और सबों के साथ विरोध प्रदर्शन (जैसे मुआवजे या नौकरी की मांग के लिए सड़कों पर धरना) पर रोक लगाना है, इसके उल्लंघन पर सजा का प्रावधान है और सबों के सम्मान पूर्वक अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना भी इसमें शामिल है।
    मुख्य बातें:–
  • कानून का नाम: –राजस्थान मृत शरीर सम्मान विधायक, 2023
  • उद्देश्य:–मृत व्यक्तियों के गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार के अधिकार को सुनिश्चित करना और शवों का उपयोग विरोध प्रदर्शन के लिए करने पर रोक लगाना
  • सजा का प्रावधान:–सबके साथ विरोध प्रदर्शन करने पर 5 साल तक की कैद या जमाने का प्रावधान है।
  • अंतिम संस्कार:–परिवार के इनकार पर लोक प्राधिकारी 24 घंटे में अंतिम संस्कार करवा सकते हैं और लावारिस सबों के लिए डीएनए प्रोफाइलिंग और रिकॉर्ड रखने का प्रावधान है।
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News Desk

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