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Mathura news; यमुना पूजन के साथ ब्रज चौरासी कोस दर्शन यात्रा का भव्य शुभारंभ : वृन्दावन में शोभायात्रा पर जगह-जगह स्वागत

अतुल्य भारत चेतना
दिनेश सिंह तरकर

वृन्दावन। धर्म नगरी वृन्दावन धाम में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से ओतप्रोत ब्रज चौरासी कोस दर्शन यात्रा का सोमवार को पावन यमुना पूजन के साथ अष्ट दिवसीय शुभारंभ हुआ। अखिल भारतीय श्रीपंच राधावल्लभीय निर्मोही अखाड़ा बड़ा रासमण्डल के श्रीमहंत लाड़ली शरण महाराज के सान्निध्य में निकली शोभायात्रा में गाजे-बाजे की धुन पर श्रद्धालु भक्तों ने जमकर थिरकते हुए भक्ति रस में डूबे। यात्रा मार्ग पर ब्रजवासियों ने फूलों की वर्षा, आरती और भव्य स्वागत से यात्रियों का हार्दिक अभिनंदन किया।

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यमुना पूजन और शोभायात्रा का शुभारंभ

सुबह के पावन समय में यमुना तट पर यमुना पूजन का विधिवत आयोजन किया गया। श्रीमहंत लाड़ली शरण महाराज ने स्वयं पूजन अर्चन कर यात्रा का शुभ संकल्प लिया। इसके बाद शोभायात्रा वृन्दावन के सर्किट हाउस से प्रारंभ हुई, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण-राधा की भव्य प्रतिमाएं, झांकियां तथा सांस्कृतिक झलकियां शामिल थीं। यात्रा गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और भक्ति भजनों के बीच निकली, जिसमें सैकड़ों भक्त पैदल चलते हुए कृष्ण लीलाओं का गुणगान कर रहे थे। शोभायात्रा मार्ग में मिश्रा चौराहा, पुलिस लाइन, जिला अस्पताल चौराहा होते हुए प्रमुख मंदिरों तक पहुंची, जहां ब्रजवासियों ने आरती, प्रसाद वितरण तथा फूलों की वर्षा से स्वागत किया। यह दृश्य देखकर भक्तों का उत्साह चरम पर था, और यात्रा ब्रज की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करती नजर आई।

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यात्रा का महत्व : आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग

श्रीमहंत लाड़ली शरण महाराज ने बताया, “यह अष्ट दिवसीय ब्रज चौरासी कोस दर्शन यात्रा देश-विदेश से आए भक्तों के लिए दिव्य अवसर है। वराह पुराण के अनुसार, ब्रज में चातुर्मास के दौरान सभी तीर्थ आकर निवास करते हैं, इसलिए इस यात्रा से सभी तीर्थों का पुण्य प्राप्त होता है।”

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ब्रज चौरासी कोस यात्रा लगभग 84 कोस (लगभग 200-300 किलोमीटर) की परिक्रमा है, जो भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े पवित्र स्थलों को कवर करती है। मान्यता है कि इस यात्रा से चौरासी लाख योनियों के चक्र से मुक्ति मिलती है। यात्रा में शामिल प्रमुख स्थल हैं :

  • मथुरा, वृन्दावन, गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव
  • मधुवन, तालवन, बहुलावन, राधाकुंड, कुसुम सरोवर
  • कामवन, कोकिलावन, चीरघाट, लोहवन आदि।

यह यात्रा भक्तों को भगवान के प्रति भक्ति व्यक्त करने का माध्यम प्रदान करती है। महाराज ने कहा, “यात्रा के दौरान मन और शरीर की शुद्धि होती है, जिससे आंतरिक शांति प्राप्त होती है। यह ब्रज की सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहरों को संरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।”

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भक्तों का उत्साह और आयोजन का संदेश

देश-विदेश से सैकड़ों भक्त इस यात्रा में शामिल हुए हैं, जो कृष्ण भक्ति में डूबे दिखे। यात्रा का समापन वृन्दावन धाम की सामूहिक परिक्रमा के साथ होगा। श्रीमहंत ने भक्तों से अपील की कि वे इस अवसर पर व्रत, दान, भजन-कीर्तन का पालन करें।

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News Desk

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